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सेवा संकल्प अभियान कहानी बदलाव की एनआरसी से आया 23 माह के मासूम रघुवीर की जिंदगी में बदलाव आगर-मालवा : शासन की पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) योजना किसी जरूरतमंद बच्चे के लिए वरदान से कम नहीं है, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण नलखेड़ा विकासखण्ड के वार्ड क्रमांक 08 के 23 माह के बालक रघुवीर की कहानी है। गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) से जूझ रहा था रघुवीर नलखेड़ा निवासी मजदूर परिवार के बेटे रघुवीर का वजन उम्र के हिसाब से बहुत कम था। मात्र 8 किलोग्राम वजन, 83 सेमी लंबाई और 11.4 सेमी. MUAC के साथ वह गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) की श्रेणी में था। चिंतित माता-पिता जब उसे सिविल अस्पताल नलखेड़ा लाए तो चिकित्सकों ने तत्काल उसे पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती किया। एनआरसी में हुई नई जिंदगी की शुरुआत एनआरसी में डॉ. पीताम्बर पालक एवं पोषण विशेषज्ञ सुश्री साक्षी आचार्य के निर्देशन में रघुवीर का निःशुल्क उपचार प्रारंभ हुआ। चिकित्सकीय निगरानी में निर्धारित पौष्टिक आहार, नियमित स्वास्थ्य जांच और माता को घर पर ही पौष्टिक भोजन बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। 14 दिन में दिखा सुधार, फॉलो-अप बना संबल 14 दिवसीय उपचार के बाद डिस्चार्ज के समय रघुवीर का वजन बढ़कर 8.570 किलोग्राम हो गया। शासन की फॉलो-अप प्रणाली के तहत निरंतर निगरानी जारी रही। प्रथम फॉलो-अप में वजन 9.000 किलो, MUAC 11.5 सेमी, द्वितीय फॉलो-अप में वजन 9.600 किलो, MUAC 11.5 सेमी, तृतीय फॉलो-अप में वजन *10.200 किलो, MUAC 11.6 सेमी हुई। आज मुस्कुरा रहा है रघुवीर आज रघुवीर पूरी तरह स्वस्थ है और उसकी मुस्कान ही इस योजना की सफलता की गवाही है। माता-पिता ने जिला प्रशासन, चिकित्सकों एवं एनआरसी स्टाफ का हृदय से आभार व्यक्त किया है। यह कहानी सिद्ध करती है कि समय पर पहचान, सही उपचार, पौष्टिक आहार और नियमित फॉलो-अप से कुपोषण को हराया जा सकता है। जन्म पर पहचान से उपचार की शुरुआत और निरंतर देखभाल से जिंदगी बदलती है। |