रतलाम। सेवा केवल जरूरत की वस्तु उपलब्ध कराने का नाम नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के साथ आत्मीयता से समय बिताकर उनके मनोबल को बढ़ाने का भी नाम है। इसी भावना को साकार करते हुए आदर्श पुरुष महिला एवं बाल बालिका सामाजिक कल्याण संस्था रतलाम द्वारा जन चेतना केंद्र स्थित मूक-बधिर विद्यालय छात्रावास में निवासरत विद्यार्थियों के लिए विशेष सेवा एवं जनचेतना कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान संस्था सदस्यों ने विद्यार्थियों को ड्राइंग बुक एवं कलर बॉक्स वितरित कर उनके चेहरों पर मुस्कान बिखेरी।
कार्यक्रम में संस्था के सदस्यों ने बच्चों के साथ आत्मीयता से समय बिताया और विभिन्न गतिविधियों में सहभागिता कर उनका उत्साहवर्धन किया। सामग्री मिलने पर विद्यार्थियों में खासा उत्साह दिखाई दिया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के साथ ही उन्हें अपनत्व और सहयोग का भाव महसूस कराना रहा।
इस अवसर पर संस्था की ओर से भारत की प्रेरणादायक महान महिलाएं विषय पर तैयार की गई सुंदर एवं प्रेरणादायक तस्वीर भी विद्यालय को भेंट की गई। तस्वीर में देश की विभिन्न महान महिलाओं के जीवन, संघर्ष और उपलब्धियों को दर्शाया गया है। संस्था पदाधिकारियों ने बताया कि विद्यार्थियों को इन प्रेरणादायक व्यक्तित्वों के जीवन से सीख लेने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए आगे बढ़ने की प्रेरणा मिले, इसी उद्देश्य से यह तस्वीर विद्यालय को प्रदान की गई है।
संस्था सदस्यों ने कहा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं होती। उन्हें आवश्यकता है उचित अवसर, प्रोत्साहन, सहयोग और अपनत्व की। समाज का दायित्व है कि ऐसे बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर सकारात्मक प्रयास किए जाएं।
कार्यक्रम में विद्यालय के विशेष शिक्षक शशी सिंह, सांकेतिक भाषा दुभाषिया वर्षिता कुमावत, शिक्षक शर्मिला भट्ट, शिक्षक ऋषिका राणावत तथा रसोइया एवं छात्रावास व्यवस्थापिका राधा मयूर उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में संस्था के पंडित ओमप्रकाश ओझा, पंडित प्रदीप जोशी, निलेश राठौड़, हेमंत राठौड़, कन्हैयालाल बोडाना, वीरेन्द्र कतीजा एवं राहुल मकवाना सहित दिशा-निर्देश प्रदान करने वाले पटवारी साहब एवं अन्य साथीगण मौजूद रहे।
संस्था पदाधिकारियों ने बताया कि संस्था द्वारा समाज के जरूरतमंद, कमजोर एवं वंचित वर्गों के लिए सेवा, सहयोग, शिक्षा, जनचेतना और सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्य निरंतर किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में मूक-बधिर विद्यालय के विद्यार्थियों के साथ समय बिताकर उन्हें उपयोगी सामग्री उपलब्ध कराई गई और उनके मनोबल को बढ़ाने का प्रयास किया गया।
संस्था ने अपने सेवा संदेश को दोहराते हुए कहा—
सेवा ही संकल्प है, मानवता ही धर्म है।