जिला संवाददाता मुकेश बीजापारी की रिपोर्ट 7697389976
कानड़ | मांगलिक भवन - तृतीय दिवस पर कथावाचक पंडित श्री रमेशचंद्र त्रिवेदी ने बताया कि प्राचीन काल में बिंदुग नामक ब्राह्मण की पत्नी चंचला स्वभाव से क्रोधी और लोभ-मोह में आसक्त थी। पति सेवा और धर्म-कर्म से विमुख होने के कारण मृत्यु उपरांत वह पिशाचिनी योनि में जंगल में भटकने लगी।
कथा श्रवण के दौरान उसके मन में वैराग्य और पश्चाताप जागा। शिव महापुराण के श्रवण प्रभाव से वह पिशाचिनी देह से मुक्त होकर दिव्य रूप में प्रकट हुई और शिवलोक के लिए प्रस्थान कर गई।पंडित जी ने कहा यही है शिवपुराण श्रवण का महात्म्य - चाहे कोई कितना भी पतित क्यों न हो, सच्चे मन से शिव कथा सुनने मात्र से मुक्ति संभव है।0कथा विवरण
- कथा समय : प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से 4 बजे तक
-स्थल : मांगलिक भवन, कानड़
-आयोजक : श्री शिव भक्त मंडल, कानड
देश : शिव महापुराण कथा के तृतीय दिवस चंचला वृत्तांत का हुआ मार्मिक वर्णन
जिला संवाददाता मुकेश बीजापारी की रिपोर्ट 7697389976
कानड़ | मांगलिक भवन - तृतीय दिवस पर कथावाचक पंडित श्री रमेशचंद्र त्रिवेदी ने बताया कि प्राचीन काल में बिंदुग नामक ब्राह्मण की पत्नी चंचला स्वभाव से क्रोधी और लोभ-मोह में आसक्त थी। पति सेवा और धर्म-कर्म से विमुख होने के कारण मृत्यु उपरांत वह पिशाचिनी योनि में जंगल में भटकने लगी।
कथा श्रवण के दौरान उसके मन में वैराग्य और पश्चाताप जागा। शिव महापुराण के श्रवण प्रभाव से वह पिशाचिनी देह से मुक्त होकर दिव्य रूप में प्रकट हुई और शिवलोक के लिए प्रस्थान कर गई।पंडित जी ने कहा यही है शिवपुराण श्रवण का महात्म्य - चाहे कोई कितना भी पतित क्यों न हो, सच्चे मन से शिव कथा सुनने मात्र से मुक्ति संभव है।0कथा विवरण