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चीताखेडा । प्रतिवर्ष दशहरा के मौके पर रावण दहन अपने अंदर झांकने और मन में छिपे दुर्गुणों से लडने की भी प्रेरणा देता है। रावण सिर्फ रामायण का एक पात्र नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के भीतर छिपा एक अवगुण भी है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व केवल शास्त्रों बल्कि 64 कलाओं में महारथ हासिल शास्त्रों के ज्ञाता रावण के 31 फिट ऊंचे पुतले का दहन कल दिवस 20 अक्टूबर 2026 मंगलवार को किया जाएगा।शक्ति की आराधना के नौ तप के दिन पूरे होते ही विजयादशमी पर्व, विजय पर्व के रूप में मनाया जाता है। रामायण की कथा से परिभाषित होने वाला यह पर्व मानवता की विजय यात्रा का पर्व है। दशहरा पर्व भारतीय संस्कृति में सबसे ज्यादा बेसब्री के साथ इंतजार किए जाने वाला त्यौहार हैं। भगवान श्री राम ने मनुष्य लीला करते हुए जिस सत्य का आचरण किया और उससे उपार्जित शक्ति से रावण का वध किया, दशहरा उसका प्रमाण है। अहंकार, अधर्म एवं छल - कपट और अत्याचार चाहे कितने भी शक्तिशाली क्यों न लिखें ,उनका अंत निश्चित है। रावण अत्यंत बलशाली, विद्वान और समृद्ध था, परंतु उसका अहंकार और अधर्म अंततः उसके विनाश का कारण बना। यह दिन श्री राम की मर्यादा और धर्म पर अडिग रहने की शिक्षा देता है। जिनका कल दिवस 20 अक्टूबर 2026 मंगलवार की शाम 7 बजे दशहरे मैदान में ग्राम पंचायत के तत्वावधान में 31 फिट ऊंचे पुतले का पटाखों की जमीनी व आसमानी रंग-बिरंगी भव्य आतिशबाजी के साथ हजारों ग्रामीणों की मौजूदगी में दहन किया जाएगा। दशहरे के दिन इस त्यौहार को मनाने से रावण के अंदर अंहकार के मार्ग बुराई के मार्ग पर चलने से ज्ञानी होने के बावजूद भी अंत तह भगवान श्रीराम के हाथों मरना पड़ा। इसी कारण वश बुराई पर अच्छाई का संदेश देता है। दशहरे पर्व के अवसर पर चारभुजा नाथ मंदिर से विशेष विमान में भगवान श्रीराम के बाल विग्रह मुखोटा विराजमान कर डीजे व ढोल-ढमाको के साथ सैकड़ों श्रद्धालु जय श्री राम के जयघोष के साथ प्रमुख मार्गों से परिभ्रमण करते हुए भव्य शोभायात्रा के रूप में दशहरे मैदान पहुंचेंगे।दशानन लंकाधिपति लंकेश के पुतले के दहन से पूर्व पटाखों की रंग-बिरंगी आतिशबाजी की जाएगी ,जिनका हजारों दर्शक इसके साक्षी बनेंगे। रिपोर्ट : दशरथ जी माली |