रतलाम। समाज सेवा केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं होती, बल्कि किसी के जीवन में आध्यात्मिक आनंद और आत्मिक शांति पहुंचाना भी सबसे बड़ी सेवा मानी जाती है। इसी सोच को साकार करते हुए रोटरी क्लब रतलाम प्राइम ने एक प्रेरणादायी पहल करते हुए वृद्धाश्रम के बुजुर्गों और बस्ती के बच्चों को श्रीमद्भागवत कथा स्थल तक लाकर कथा श्रवण कराया। कथा समाप्त होने के बाद सभी को सुरक्षित उनके गंतव्य तक भी पहुंचाया गया। इस अनूठी सेवा ने मानवता, संस्कार और सेवा भाव का सुंदर संदेश दिया।
रोटरी क्लब रतलाम प्राइम के अध्यक्ष गौरव ऐरन एवं सचिव विकास छाजेड़ ने बताया कि क्लब द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान वृद्धाश्रम से लगभग 20 बुजुर्गों और बस्ती से 15 बच्चों को विशेष व्यवस्था के साथ कथा स्थल लाया गया। पूरे आयोजन में सभी के बैठने, आने-जाने और आवश्यक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया ताकि वे बिना किसी परेशानी के कथा का आनंद ले सकें।
श्रीमद्भागवत कथा के दौरान बुजुर्ग भक्ति रस में डूबे नजर आए।
कथा समाप्त होने पर उन्होंने भावुक होकर रोटरी क्लब के सदस्यों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि लंबे समय बाद उन्हें ऐसा आध्यात्मिक वातावरण मिला, जिससे मन को अपार शांति और सुकून प्राप्त हुआ। वहीं बच्चों ने भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ कथा का श्रवण किया तथा धार्मिक एवं नैतिक संस्कारों से जुड़ने का अवसर प्राप्त किया।
क्लब पदाधिकारियों ने बताया कि रोटरी क्लब रतलाम प्राइम केवल सामाजिक ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक सेवा कार्यों में भी लगातार सक्रिय है। क्लब का उद्देश्य समाज के हर वर्ग, विशेषकर जरूरतमंद, बुजुर्ग और बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ते हुए उन्हें सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना है। यह सेवा अभियान प्रतिदिन जारी है और रोटरी के अंतरराष्ट्रीय आदर्श स्वार्थ से ऊपर उठकर सेवा (Service Above Self) को धरातल पर उतारने का प्रयास किया जा रहा है।
इस सेवा कार्य को सफल बनाने में गौरव ऐरन, विकास छाजेड़, मिलेश कटकानी, नितिका ऐरन, पूजा छाजेड़, टीना सुरेखा, रानी दलाल, प्रीति राजपाल सहित रोटरी क्लब रतलाम प्राइम के अनेक सदस्यों की सराहनीय भूमिका रही। शहर के सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र में क्लब की यह पहल लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है तथा इसे सेवा, संस्कार और मानवता का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत