आलोट/रतलाम
जनपद पंचायत आलोट अंतर्गत ग्राम पंचायत लसुड़ियाखेड़ी के ग्राम खेड़ी ताल में आंगनवाड़ी केंद्र को लेकर विवाद अब बड़ा जनआंदोलन बनता जा रहा है। ग्रामीणों ने महिला एवं बाल विकास विभाग, स्थानीय प्रशासन तथा संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि गांव में वर्ष 2016 से खाली पड़े शासकीय प्राथमिक विद्यालय भवन को छोड़कर एक निजी मकान को किराये पर लेने की तैयारी की जा रही है, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग होने की आशंका है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पिछले लगभग 15 वर्षों से आंगनवाड़ी केंद्र निजी भवन में संचालित किया जा रहा है। जबकि गांव का शासकीय स्कूल भवन बच्चों की संख्या कम होने के कारण वर्षों से खाली पड़ा हुआ है। भवन की मरम्मत कराने के लिए ग्राम पंचायत भी तैयार बताई जा रही है, लेकिन इसके बावजूद बच्चों को सरकारी परिसर में स्थानांतरित नहीं किया जा रहा।
एसडीएम ने दिए शिफ्टिंग के संकेत
मामले को लेकर पत्रकारों द्वारा की गई शिकायत पर एसडीएम आलोट रचना शर्मा ने जवाब देते हुए बताया कि वर्तमान भवन जर्जर स्थिति में है तथा सीडीपीओ को निर्देश दिए गए हैं कि आंगनवाड़ी केंद्र को अन्यत्र स्थानांतरित किया जाए। एसडीएम ने यह भी कहा कि एक-दो दिन में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता केंद्र को शिफ्ट कर लेंगी।
हालांकि ग्रामीणों का दावा है कि अधिकारियों को गांव में मौजूद खाली शासकीय भवन की जानकारी होने के बावजूद निजी मकान का विकल्प चुना जा रहा है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
अभिषेक सिंह, सुमेर सिंह और उषा कुंवर का नाम चर्चा में
ग्रामीणों द्वारा जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) को भेजे गए आवेदन में उल्लेख किया गया है कि वर्तमान में आंगनवाड़ी केंद्र अभिषेक सिंह सिसोदिया के निजी भवन में संचालित हो रहा था। अब इसे सुमेर सिंह पिता मान सिंह के मकान में किराये से संचालित करने की तैयारी की जा रही है ग्रामीणों का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया से कुछ प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने का प्रयास हो रहा है।
ग्रामीणों ने यह भी दावा किया है कि स्वयं मुंशी सिंह, जो सुमेर सिंह के सगे भाई बताए जा रहे हैं, उन्होंने भी निजी मकान में आंगनवाड़ी संचालित करने का विरोध किया है और शासकीय स्कूल भवन में ही केंद्र संचालित करने की मांग की है।
‘ सोशल मिडिया ’ की खबर के बाद बढ़ा दबाव
सोशल मीडिया एवं स्थानीय समाचार पत्र नें भी इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित करते हुए सवाल उठाया था कि जब गांव में सरकारी भवन मौजूद है तो बच्चों को निजी घर में क्यों रखा जा रहा है? समाचार प्रकाशित होने के बाद मामला जिला स्तर तक पहुंच गया और ग्रामीणों ने कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ तथा महिला एवं बाल विकास विभाग से हस्तक्षेप की मांग की है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
बंद पड़े शासकीय स्कूल भवन की तत्काल मरम्मत कर आंगनवाड़ी वहां संचालित की जाए।
निजी मकान किराये पर लेने की प्रक्रिया और पंचनामे की जांच हो।
ग्रामीणों से लिए गए हस्ताक्षरों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट की जाए।
अब सबकी नजर प्रशासन पर
खेड़ी ताल का यह मामला अब केवल आंगनवाड़ी केंद्र के स्थानांतरण तक सीमित नहीं रह गया है यह मामला सरकारी संपत्तियों के उपयोग, सरकारी धन के खर्च, प्रशासनिक निर्णयों की पारदर्शिता और कई महत्वपूर्ण मुद्दों से जुड़ गया है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन ग्रामीणों की मांगों पर क्या निर्णय लेता है और क्या बच्चों को आखिरकार उस शासकीय भवन का लाभ मिलेगा जो वर्षों से खाली पड़ा है।
(नोट: समाचार में लगाए गए आरोप ग्रामीणों एवं प्रस्तुत दस्तावेजों/आवेदनों पर आधारित हैं।)
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत