ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है, जिससे मेले में आने वाले हजारों श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। हर वर्ष चैत्र नवरात्रि के दौरान इस मार्ग से करीब 30 से 40 हजार श्रद्धालु आवरीमाता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
कलेक्टर के निर्देशों का भी असर नहीं
5 मार्च को मंदिर समिति ने जिला कलेक्टर डॉ. हिमांशु चंद्रा को ज्ञापन सौंपकर सड़क की स्थिति से अवगत कराया था। इसके बाद कलेक्टर और एसडीएम संजीव साहू के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग की एसडीओ नेहा राठौर ने ठेकेदार को 15 मार्च तक सड़क को चलने योग्य बनाने के निर्देश दिए थे।
हालांकि 14 मार्च तक जमीनी स्थिति में कोई खास सुधार नजर नहीं आया है। सड़क अब भी खुदी हुई है और जगह-जगह नुकीली गिट्टियां बिखरी हुई हैं, जिससे श्रद्धालुओं के लिए मार्ग जोखिम भरा बना हुआ है।
श्रद्धालुओं के लिए खतरा बना मार्ग
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क की यही स्थिति रही तो मेले में आने वाले हजारों पदयात्रियों और श्रद्धालुओं को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य की धीमी गति से धार्मिक आस्था से भी खिलवाड़ हो रहा है।
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मेले से पहले सड़क को सुगम नहीं बनाया गया, तो वे आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए मजबूर होंगे। उनका कहना है कि प्रशासन को कागजी कार्रवाई के बजाय मौके पर काम दिखाना चाहिए।
इनका कहना है
दशरथ माली, सदस्य आवरीमाता मंदिर ट्रस्ट, चीताखेड़ा का कहना है कि ठेकेदार द्वारा हजारों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। अब तक सड़क निर्माण कार्य में कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं दे रही है। यदि मेले से पहले सड़क सुगम नहीं हुई तो इसकी जिम्मेदारी ठेकेदार और प्रशासन की होगी।
रिपोर्ट : दशरथ माली