|
चीताखेडा। धरती का सबसे सहनशील और मेहनतशील अगर कोई है तो वह है धरती का पालनहार किसान। राजनीतिक दलों के लिए किसान सिर्फ औपचारिक कार्यक्रमों और भाषणों तक सीमित रहकर रह गया है, किसानों की वास्तविकता पीड़ा को समझने और स्थायी समाधान से कोई सरोकार नहीं है। किसान आज अनेक स्तर के संकट से गुजर रहा है। वर्षाकाल में भी अल्प वर्षा के कारण सुखे की स्थिति निर्मित हो गई है। जीरन तहसील को सुखा घोषित किया जाएं। उपरोक्त जानकारी किसान नेता पर्वत सिंह जाट ने अल्प वर्षा के कारण जीरन तहसील को सुखा घोषित किए जाने को लेकर प्रेस विज्ञप्ति में देते हुए बताया है कि राजनीतिक दल सिर्फ चुनावी सीजन में किसानों को अपने वोट बैंक की नजर से देखते हुए थोथी घोषणाओं के जाल में फांस कर अपना स्वार्थ सिद्ध कर फिर भुल जाते हैं। प्राकृतिक आपदाओं , कभी अल्प तो कभी अतिवृष्टि तो कभी अससमय वर्षा और मौसम की अनिश्चिता ने फसलों को भारी नुकसान का खामियाजा भुगतना पड़ता है। ऐसे में फसल मुआवजा और बीमा योजना किसानों के लिए सुरक्षा कवच होनी चाहिए थी, किंतु जटिल प्रक्रियाओं और भुगतान में अत्यधिक देरी के कारण यह योजना बोझ बनती जा रही है। अल्प वर्षा से खरीफ सीजन की फसलों को भारी नुकसान का समय पर मुआवजा और बीमा राशि न मिलाना, संकट की घड़ी में किसानों को और अधिक असहाय बना देता है। भावांतर राशि का भुगतान समय पर न होना भी समस्या है। समय पर खाद, बीज, कीटनाशक और सिंचाई के लिए पूंजी की व्यवस्था करना किसानों के लिए अत्यंत कठिन है। जब तक नीतियां जमीन पर प्रभावी रूप से लागू नहीं होगी ,तब तक किसानों की स्थिति में वास्तविक सुधार संभव नहीं है। किसान नेता पर्वत सिंह जाट ने कहा कि किसान का बेटा कह देना तभी सार्थक होगा,जब अन्नदाता के सम्मान और जीवन में ठोस और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक बनेगा। वर्तमान में भी इस बार अल्प वर्षा के कारण कुआं और बावड़ी तथा नदी तालाब रीते पड़े हुए हैं। भूजल स्तर गहरा जाने से आने वाले समय में पानी के लिए भयंकर समस्या बन जाएगी। खेतों में नमी पूरी तरह से चली गई है जिससे रबी सीजन की फसलों को सिंचाई कर पाना मुश्किल हो गया है।सारी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए जीरन तहसील को सुखा घोषित किया जाएं। वहीं खरीफ सीजन की फसलों में हुए नुकसान का मुआवजा और बीमा राशि शीघ्र किसानों को उपलब्ध कराई जाए। रिपोर्ट : दशरथ जी माली |