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हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने दिया था कर्मचारी को स्थायीकर्मी की श्रेणी देने का आदेश जिसके बाद म.प्र. शासन ने की थी डिविजन बेंच के समक्ष अपील जिसे मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच ने खारिज कर दिया मध्यप्रदेश शासन ने कर्मचारी के उस आदेश को हाईकोर्ट की डिविजन बेंच के समक्ष चुनौती दी थी जिस आदेश में हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने कर्मचारी की रिट याचिका स्वीकार कर कर्मचारी को स्थायीकर्मी का दर्जा देने का आदेश दिया गया था। म.प्र. शासन यही नहीं चाह रहा था कि कर्मचारी को लगभग 15 वर्षो तक सेवा देने के बाद भी स्थायीकर्मी का दर्जा प्राप्त हों। कर्मचारी के एडवोकेट गौरव पांचाल ने बताया कि कर्मचारी का चयन दिनांक 12.02.2009 को दैनिक श्रमिक कलेक्टर द्वारा निर्धारित दर पर किया गया जिसके पश्चात दिनांक 18.02.2009 को कर्मचारी को अजा उत्कृष्ट बालक छात्रावास नीमच में रसोईया कम जलवाहक के पर प्रक्षिक्षण हेतु भेजा गया। कर्मचारी की नियुक्ति के पूर्व नीमच कलेक्टर एवं मुख्य नगरपालिका अधिकारी द्वारा आपस में पत्र जारी कर दैनिक वेतन भोगी के पदों की पूर्ति करने हेतु अनुमति एवं अनुमोदन पत्र जारी किए गए। कर्मचारी के सेवा में रहने के दौरान म.प्र. शासन के सामान्य प्रशासन के विभाग द्वारा दिनांक 07.10.2016 को एक परिपत्र जारी कर कार्यरत दैनिक वेतन भोगीयों के लिए स्थायी कर्मियों को विनियमित करने की योजना बाबत अधीनस्थ मध्यप्रदेश के सभी कलेक्टर एवं विभागाध्यक्षों को दिशा-निर्देश जारी किए गए उक्त पत्र में स्पष्ट रूप से यह उल्लेखित किया गया कि दिनांक 16 मई 2007 के पश्चात शासन की अनुमति/अनुमोदन उपरान्त सक्षम अधिकारी द्वारा दैनिक वेतन भोगी के पद पर नियुक्त किये गये है उन्हें भी योजना की पात्रता होगी। योजना के अन्तर्गत पात्रता रखते हुए कर्मचारी द्वारा उसे स्थायीकर्मी की श्रेणी दी जाकर उसके अनुसार वेतनमान एवं अन्य लाभ प्रदान करने संबंधी कई अभ्यावेदन नीमच कलेक्टर एवं मुख्य नगरपालिका अधिकारी सहित अन्य अधिकारियों को प्रस्तुत किए गए परन्तु नीमच कलेक्टर एवं मुख्य नगरपालिका अधिकारी द्वारा कर्मचारी को स्थायीकर्मी की श्रेणी नहीं देकर विनियमित नहीं किया गया तत्पश्चात रिट याचिका 6733/2021 एवं अवमानना याचिका 768/2022 लगाने के पश्चात भी आदिम जाति कल्याण विभाग के संयोजक द्वारा दिनांक 13.04.2022 को एक आदेश जारी कर कर्मचारी की स्थायीकर्मी की मांग को अस्वीकार कर दिया गया। आदिम जाति कल्याण विभाग के संयोजक द्वारा जारी आदेश दिनांक 13.04.2022 को कर्मचारी द्वारा हाईकोर्ट एडवोकेट गौरव पांचाल के माध्यम से हाईकोर्ट इन्दौर के समक्ष चुनौती देकर दूसरी रिट याचिका 3942ध्2024 प्रस्तुत की गई जो कि हाईकोर्ट की सिंगल बेंच द्वारा दिनांक 09.12.2025 को स्वीकार कर कर्मचारी को स्थायीकर्मी का लाभ प्रदान करने के आदेश दिये गये थे। म.प्र. शासन द्वारा हाईकोर्ट की सिंगल बेंच द्वारा जारी आदेश को डिविजन बेंच के समक्ष चुनौती दी गई जिसमें कर्मचारी के एडवोकेट द्वारा हाईकोर्ट की डिविजन बेंच के समक्ष तर्क रखे कि कर्मचारी पिछले 15 वर्षोे से विभाग मे कार्यरत होकर ईमानदारी एवं लगन से कार्य कर रहा है जो कि मध्यप्रदेश शासन की योजना दिनांक 07.10.2016 के अंतर्गत स्थायीकर्मी की श्रेणी का पात्र हैं। आदिम जाति कल्याण विभाग के संयोजक गलत तरीके से अनुमति/अनुमोदन का बहाना बनाकर कर्मचारी की स्थायीकर्मी की मांग को अस्वीकार किया गया जबकि कर्मचारी के प्रकरण में भर्ती के समय ही कलेक्टर नीमच द्वारा म.प्र. शासन द्वारा अनुमोदन प्राप्त कर लिया गया था इस कारण इस रिट अपील को निरस्त किया जाना उचित होगा। इसके अतिरिक्त तर्क रखे गए कि कर्मचारी के समकक्ष कर्मचारियों जो कि मंदसौर जिले में कार्यरत है उन्हें भी कर्मचारी की श्रेणी प्रदान की जा चुकी है जबकि कर्मचारी के साथ भेदभाव कर उसे स्थायीकर्मी की श्रेणी का लाभ प्रदान नहीं किया जा रहा है जो कि भारत के संविधान में दिए गए समानता के अधिकार का उल्लंघन हैं। हाईकोर्ट ने कर्मचारी के एडवोकेट के तर्को से सहमत होकर यह पाया कि कर्मचारी की नियुक्ति म.प्र. शासन की स्वीकृति उपरांत ही की गई थी एवं कर्मचारी स्पष्ट रूप से स्थायीकर्मी की योजना दिनांक 07.10.2026 के दायरे में आता है। हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने यह भी पाया कि भर्ती प्रक्रिया नगरपालिका परिषद, नीमच द्वारा कई कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए संचालित की गई थी, जो 22.10.2007 को कलेक्टर द्वारा जारी निर्देशों के अनुपालन में थी और कर्मचारी को रसोईया व जलवाहक के पद पर चुना गया है और तब से वह अपने कर्तव्यों का पालन कर रहा है। हाईकोर्ट द्वारा सुप्रीम कोर्ट के स्टेट आफ कर्नाटक विरूद्ध उमादेवी के प्रकरण का भी हवाला दिया गया जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिपादित किया था कि लम्बे समय तक कार्यरत कर्मचारियों को नियमीतीकरण किया जाना। इस प्रकार हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश को उचित एवं सही माना और म.प्र. शासन की अपील को निरस्त कर दिया गया। कर्मचारी ने इस हेतु अवमानना याचिका भी प्रस्तुत कर रखी है जिसके सरंक्षण हेतु म.प्र. शासन ने रिट अपील प्रस्तुत की थी परन्तु रिट अपील के खारिज होने से अवमानना प्रकरण में म.प्र. शासन को अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करन कर याचिकाकर्ता को स्थायीकर्मी का दर्जा देना होगा। गौरव पांचाल एडवोकेट मो.न. 9926711664 |