रतलाम / सैलाना / बुधनी। मध्यप्रदेश के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी गांव में आदिवासियों के मकानों को तोड़ने की कार्रवाई का मामला अब राजनीतिक और सामाजिक तूल पकड़ता नजर आ रहा है। सैलाना विधानसभा क्षेत्र के भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के विधायक कमलेश्वर डोडियार पीड़ित आदिवासी परिवारों के बीच पहुंचे और उनके धरना-प्रदर्शन में शामिल होकर कार्रवाई के खिलाफ आवाज बुलंद की। विधायक ने आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कई दशकों से जमीन पर खेती कर जीवनयापन कर रहे आदिवासियों को बेदखल करने की कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनके अधिकारों की लड़ाई सड़क से सदन तक लड़ी जाएगी।
पूर्व और वर्तमान सरकारों पर साधा निशाना
विधायक कमलेश्वर डोडियार ने पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार पर आदिवासियों के अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री लंबे समय तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, लेकिन आदिवासियों को उनकी जमीनों के अधिकार और पट्टे दिलाने की दिशा में अपेक्षित काम नहीं हुआ। अब वर्तमान सरकार के कार्यकाल में आदिवासी परिवारों को बेदखली की कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।
डोडियार ने आरोप लगाया कि कोसमी में कार्रवाई के दौरान आदिवासियों की खेतों में खड़ी फसलें नष्ट की गईं, पेयजल के स्रोतों को नुकसान पहुंचाया गया तथा मकानों और घरेलू खाद्य सामग्री को बर्बाद किया गया।
उन्होंने महिलाओं और बच्चों के साथ मारपीट, जातिगत दुर्व्यवहार और लोगों के मोबाइल फोन छीनने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
उजाड़ने के बजाय अधिकार और सुविधाएं दें
विधायक ने कहा कि आदिवासी परिवारों को बेदखल करना समस्या का समाधान नहीं है। यदि वे लंबे समय से जमीन पर काबिज हैं और पात्रता की शर्तें पूरी करते हैं, तो उनके दावों की जांच कर वन अधिकार अधिनियम के तहत जमीन के अधिकार और पट्टे दिलाने की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आदिवासी परिवारों को बिजली, सड़क, पेयजल और बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। लोगों के आशियाने उजाड़ने और आजीविका के साधन नष्ट करने के बजाय उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर दिया जाना चाहिए।
भाजपा सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान
कमलेश्वर डोडियार ने कहा कि आदिवासियों का संघर्ष केवल मकानों को बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी जमीन, आजीविका, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिला और उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो प्रदेश की भाजपा सरकार के खिलाफ आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
विधायक ने दो टूक कहा कि आदिवासियों को उनके पुश्तैनी अधिकारों से वंचित नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने पीड़ित परिवारों के साथ खड़े रहने और उन्हें न्याय दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास करने का भरोसा दिलाया।
अब बड़ा सवाल यह है कि कोसमी के पीड़ित आदिवासी परिवारों को न्याय कब मिलेगा? क्या सरकार बेदखली की कार्रवाई और उससे जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच कराएगी, या फिर जल, जंगल और जमीन के अधिकारों को लेकर संघर्ष और तेज होगा?
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत