रतलाम। शहर की ऐतिहासिक धरोहर गुलाब चक्कर पर सुरों और संगीत का ऐसा रंग जमा कि पूरा माहौल सदाबहार फिल्मी गीतों की मधुर धुनों से गूंज उठा। त्रक धा म्युजिकल ग्रुप, रतलाम द्वारा आयोजित संगीतमय कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों के साथ अतिथि कलाकारों ने अपनी गायकी से श्रोताओं का मन मोह लिया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भोपाल से आए गायक राजेन्द्र बुजाड़े रहे, जिन्होंने अपने शानदार अंदाज में प्रस्तुति देकर खूब तालियां बटोरीं। उनकी गायकी पर श्रोता झूमने लगे और गुलाब चक्कर की शाम संगीत के यादगार उत्सव में बदल गई।
कार्यक्रम में राजेन्द्र बुजाड़े ने लोकप्रिय गीत मैं झूम झूम झुमरू की प्रस्तुति देकर समां बांध दिया। इसके साथ ही परदेशिया ये सच है पिया और जानेमन जानेमन तेरे दो नयन जैसे खूबसूरत गीतों की प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी आवाज और प्रस्तुति के अंदाज ने कार्यक्रम में विशेष आकर्षण पैदा किया।
एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों ने जीता दिल
संगीतमय शाम में अन्य कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया। ललिता गामड़ ने ‘दिल में तुझे बिठा के’ एवं तुम ही मेरे मंदिर रमन जैन ने क्या हुआ एक बात पर शिल्पा अग्रवाल ने यह मुलाकात एक बहाना है और सुजीत शर्मा ने डम डम डिगा डिगा गीत प्रस्तुत किया।
वहीं राजेश ओझा ने गोरे-गोरे चाँद से मुख पर, कृष्णा सोनगरा ने तूने ओ रंगीले कैसा जादू किया, हेमंत सोनगरा ने कभी खोले ना तिजोरी का ताला, प्रदीप शर्मा ने झनक झनक तोरी पायल बाजे और पीयूष पाठक ने हाल क्या है दिलों का गीत सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी।
पूजा भावसार ने मैं तेनू समझावां की राघवेन्द्र सिंह ने तेरे दर पर सनम चले आए, दलजीत सिंह संधू ने मैं तो एक ख्वाब हूँ, नाजिम शेख ने खुदा खैर करे, आशीष चौहान ने कहानियाँ सुनाती है’ तथा मनीष शर्मा ने तुम अगर साथ देने का गीत प्रस्तुत किया।
इसी क्रम में राधा डामोर ने पालकी में होके सवार देव सर ने ठन-ठन की सुनो झंकार अशोक छपरी ने तू मुझे जान से प्यारा है और रतन चौहान ने हुई शाम उनका ख्याल आ गया गीत से संगीत प्रेमियों का दिल जीत लिया।
देवेन्द्र सिंह भदौरिया के संचालन ने लगाए चार चांद
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री बालकृष्ण तिवारी रहे। कार्यक्रम का संचालन देवेन्द्र सिंह भदौरिया ने किया। अपनी प्रभावशाली संचालन शैली, गीतों से जुड़े रोचक प्रसंगों और आकर्षक प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने कार्यक्रम को जीवंत बनाए रखा। उनके संचालन ने संगीत की इस महफिल में चार चांद लगा दिए।
प्रतिभाओं को मंच देना ही ग्रुप का उद्देश्य
इस आयोजन में त्रक धा म्युजिकल ग्रुप की पूरी टीम की सक्रिय सहभागिता रही। टीम के प्रमुख सदस्यों में देव सर, अशोक छपरी, रतन चौहान, कृष्णकांत महावर, गीता बोरासी, मीना महावर, मनोहर मीणा, सुरेखा माना, चंचल मईडा, राजेश माना एवं अशोक मेहता शामिल रहे।
त्रक धा म्युजिकल ग्रुप ने अतिथि कलाकारों को मंच प्रदान कर संगीत के क्षेत्र में एक नई पहल की। इस आयोजन के माध्यम से कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला, वहीं संगीत प्रेमियों को एक ही मंच पर विविध गीतों का आनंद लेने का मौका मिला।
ऐतिहासिक गुलाब चक्कर पर सजी इस संगीतमय शाम ने एक बार फिर साबित किया कि सदाबहार गीतों का जादू आज भी लोगों के दिलों में कायम है। शानदार गायकी, लोकप्रिय नगमों और बेहतरीन संचालन से सजा यह आयोजन संगीत प्रेमियों के लिए यादगार बन गया।
कार्यक्रम के अंत में त्रक धा म्युजिकल ग्रुप की ओर से अशोक मेहता ने सभी अतिथियों, कलाकारों और उपस्थित संगीत प्रेमियों का आभार व्यक्त किया।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत