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चीताखेड़ा। गांव में एक किसान द्वारा सदियों पुराने नाले में मिट्टी डालकर बारिश के पानी का बहाव रोक दिए जाने से सैकड़ों किसानों की परेशानी बढ़ गई है। नाले का पानी आम रास्ते पर भर जाने से मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है। किसानों के मुताबिक रास्ते पर करीब ढाई से तीन फीट तक पानी जमा है, जिससे खेतों तक आना-जाना और कृषि कार्य करना मुश्किल हो गया है। मामले में शिकायत के 17 दिन बाद भी समाधान नहीं होने से किसानों में अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर आक्रोश है। किसानों के अनुसार उन्होंने करीब 17 दिन पहले मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के निराकरण के लिए नायब तहसीलदार द्वारा दो-तीन दिन में समस्या का समाधान कराने का भरोसा दिया गया, जिसके बाद किसानों ने शिकायत वापस ले ली। लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी समस्या जस की तस बनी रही। इसके बाद किसानों ने 18 अगस्त को जिला कलेक्टर की जनसुनवाई में बड़ी संख्या में पहुंचकर अपनी समस्या रखी। मामले को गंभीरता से लेते हुए 20 अगस्त को नायब तहसीलदार संतोष घाटिया और पटवारी संदेश चैलावत मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने स्थिति का निरीक्षण कर पंचनामा बनाया, लेकिन किसानों का कहना है कि इसके बाद भी आज तक नाला नहीं खुलवाया गया। किसान रतनलाल माली ने बताया कि मौके पर पहुंचे नायब तहसीलदार के आश्वासन पर उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शिकायत वापस ले ली थी। उनका कहना है कि 17 दिन बीत जाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ, जिससे किसानों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं किसान बालमुकुंद जावरिया का कहना है कि करीब 200 किसानों की परेशानी को नजरअंदाज कर एक व्यक्ति को प्राथमिकता दी जा रही है। रास्ते में पानी भरने के कारण किसानों को अपने खेतों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है और कृषि कार्य प्रभावित हो रहा है। नायब तहसीलदार ने कहा—एक-दो दिन में खुलवा देंगे नाला मामले में नायब तहसीलदार संतोष घाटिया, तहसील जीरन ने बताया कि मौके पर जाकर स्थिति देखी गई है। पानी का बहाव अवरुद्ध किया गया है। नाला खुलवाने के लिए संबंधित अधिकारी को आदेश जारी करने हेतु प्रतिवेदन दिया गया है। उन्होंने कहा कि एक-दो दिन में आदेश लेकर नाला खुलवा दिया जाएगा। अब किसानों की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर है। सवाल यह है कि जब मौके का निरीक्षण कर पंचनामा भी बनाया जा चुका है, तो आखिर 17 दिनों से बंद नाले को खुलवाने में इतनी देरी क्यों हुई? रिपोर्ट : दशरथ जी माली |