रतलाम / सैलाना । बच्चों के हाथों में पौधे और आंखों में हरियाली से भरे भविष्य का सपना—ठिकरिया विद्यालय में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक नई उम्मीद जगाई। वाग्धारा संस्था के तत्वावधान में विद्यालय परिसर में औषधीय पौधों को हर-घर तक पहुंचाने के साथ स्वास्थ्य, पोषण, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन विषय पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को स्थानीय एवं औषधीय पौधों के महत्व से परिचित कराना तथा पौधारोपण के साथ उनकी नियमित देखभाल की जिम्मेदारी के लिए प्रेरित करना रहा।
कार्यक्रम के दौरान वाग्धारा संस्था की टीम ने विद्यार्थियों को आंवला, तुलसी, नीम, गिलोय, इमली, हड़जोड़, सहजन, हल्दी, अदरक, पुदीना, एलोवेरा, नींबू, पपीता, मीठा नीम, जामुन और शहतूत सहित विभिन्न उपयोगी पौधों की पहचान कराई। बच्चों को इन पौधों के पारंपरिक उपयोग, पोषण संबंधी महत्व तथा सामान्य स्वास्थ्य उपयोगों की जानकारी सरल और रोचक तरीके से दी गई।
प्रश्नोत्तरी और गतिविधियों में बच्चों ने दिखाया उत्साह
कार्यक्रम को केवल जानकारी तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों को संवादात्मक गतिविधियों से जोड़ा गया। बच्चों से विभिन्न पौधों की पहचान, उनके उपयोग और घर-परिवार में उनके महत्व को लेकर सवाल किए गए। विद्यार्थियों ने भी अपने घरों और गांव में पाए जाने वाले पौधों से जुड़े अनुभव साझा किए। प्रश्नोत्तरी एवं पहचान गतिविधियों में बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इस अवसर पर शिक्षा विभाग से नरेंद्र कुमार पारसी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि पेड़-पौधे हमारे जीवन का महत्वपूर्ण आधार हैं। बढ़ते तापमान और बदलते पर्यावरण के दौर में प्रत्येक व्यक्ति को प्रकृति संरक्षण में अपनी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने बच्चों से आह्वान किया कि पौधा लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधे की नियमित देखभाल कर उसे बड़ा करना भी उतनी ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने बच्चों को अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी पौधारोपण के लिए प्रेरित करने की बात कही।
पौधा लगाना शुरुआत, देखभाल करना असली जिम्मेदारी
वाग्धारा संस्था की ब्लॉक फैसिलिटेटर पिंकी ने बच्चों से संवाद करते हुए कहा कि हमारे आसपास मौजूद अनेक पौधे भोजन, पोषण, पारंपरिक स्वास्थ्य ज्ञान और पर्यावरण से सीधे जुड़े हैं। उन्होंने समझाया कि पौधों का महत्व केवल औषधीय उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि पेड़-पौधे मिट्टी, पानी, जैव विविधता और वातावरण के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने बच्चों को प्रेरक संदेश देते हुए कहा—एक पौधा लगाना शुरुआत है, लेकिन उसकी देखभाल करना हमारी असली जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों से घर और विद्यालय में पौधे लगाने तथा उनकी जिम्मेदारी स्वयं लेने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में वाग्धारा संस्था के सामुदायिक सहजकर्ता जगदीश गामड़, मनोज डामर, कांतिलाल एवं अमृतराम परिहार ने भी विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। उन्होंने स्थानीय स्तर पर पाए जाने वाले पौधों, उनके उपयोग और संरक्षण के महत्व पर चर्चा करते हुए बच्चों को अपने परिवार के बुजुर्गों से पारंपरिक पौधों एवं उनसे जुड़े पारंपरिक ज्ञान की जानकारी प्राप्त करने तथा उसे सुरक्षित रखने के लिए प्रेरित किया।
जलवायु परिवर्तन के बीच पौधों का संरक्षण जरूरी
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को वर्तमान समय की गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों से भी अवगत कराया गया। बच्चों को बताया गया कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा और पर्यावरणीय असंतुलन आज पूरी दुनिया के सामने बड़ी चुनौती हैं। ऐसे समय में स्थानीय पौधों का संरक्षण, अधिक से अधिक पौधारोपण, जल एवं मिट्टी संरक्षण और जैव विविधता को बचाना बेहद जरूरी है।
बच्चों को यह संदेश दिया गया कि यदि विद्यालय का प्रत्येक विद्यार्थी एक पौधा लगाए और उसे बड़ा करने की जिम्मेदारी स्वयं उठाए, तो विद्यालय से शुरू हुआ यह छोटा कदम आने वाले समय में पूरे गांव को हराभरा बनाने की बड़ी मुहिम में बदल सकता है।
कार्यक्रम में ठिकरिया विद्यालय का समस्त स्टाफ एवं समस्त विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों एवं उपस्थितजनों ने अधिक से अधिक पौधे लगाने, पौधों का संरक्षण करने तथा लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने का संकल्प लिया।
ठिकरिया विद्यालय का यह आयोजन सिर्फ पौधे बांटने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों के हाथों में हरियाली और उनके मन में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का बीज बो गया—जो आने वाले कल में एक हरे-भरे और स्वस्थ गांव की नींव बन सकता है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत