रतलाम/सैलाना : मध्यप्रदेश शासन द्वारा कृषि उपज मंडियों में लगने वाले मंडी शुल्क को 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत किए जाने के विरोध में मंगलवार को रतलाम और सैलाना की कृषि उपज मंडियों में व्यापक बंद का असर देखने को मिला। प्रदेश स्तरीय आह्वान पर दोनों मंडियों के व्यापारियों ने एकजुटता का परिचय देते हुए कारोबार पूरी तरह बंद रखा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपकर शुल्क वृद्धि का निर्णय तत्काल वापस लेने की मांग की।
रतलाम कृषि उपज मंडी में अनाज, दलहन एवं तिलहन व्यापारी महासंघ के आह्वान पर सभी व्यापारी संगठन एक मंच पर आए। मंडी में नीलामी और खरीदी का कार्य पूरी तरह ठप रहा। प्रातःकाल व्यापारी मंडी परिसर में एकत्रित हुए और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन मंडी भारसाधक अधिकारी एवं एसडीएम तरुण जैन को सौंपा। ज्ञापन का वाचन मंडी व्यापारी युवा संघ के अध्यक्ष दिलीप मेहता ने किया।
दि ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र चत्तर ने कहा कि मंडी शुल्क में 0.5 प्रतिशत की वृद्धि से व्यापारियों के साथ-साथ किसानों पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। व्यापारियों ने मंडी बोर्ड के कुछ अधिकारियों पर आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास करने का आरोप लगाते हुए इसकी निंदा की और कहा कि जनप्रतिनिधियों को गुमराह कर यह निर्णय थोपा गया है।
उधर, सैलाना कृषि उपज मंडी में भी व्यापारियों ने एकजुट होकर मंडी परिसर में कारोबार बंद रखा तथा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन एसडीएम सुनील कुमार जायसवाल को सौंपा। व्यापारी संघ के अध्यक्ष इंद्रेश चंडालिया ने कहा कि शुल्क वृद्धि का सीधा असर कृषि जिंसों के व्यापार पर पड़ेगा, जिससे किसानों और व्यापारियों दोनों को नुकसान उठाना पड़ेगा। संघ के सचिव पंकज सियार ने ज्ञापन का वाचन किया।
व्यापारियों ने शासन से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने और बढ़ा हुआ मंडी शुल्क तत्काल वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा।
रतलाम में आंदोलन को सफल बनाने में दि ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट्स एसोसिएशन, रतलाम मंडी व्यापारी संघ, मंडी व्यापारी युवा संघ, संघर्षशील लहसुन-प्याज मंडी युवा व्यापारी संघ तथा श्री रत्नपुरी लहसुन-प्याज मंडी व्यापारी संघ सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों और सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। बड़ी संख्या में व्यापारी मंडी परिसर में मौजूद रहे।
प्रदेशभर में मंडी शुल्क वृद्धि के खिलाफ उठ रही आवाज के बीच रतलाम और सैलाना की मंडियों का पूर्ण बंद यह संकेत दे रहा है कि व्यापारी वर्ग इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है और यदि सरकार ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन आगामी दिनों में और तेज हो सकता है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत