रतलाम
रतलाम शहर के जावरा फाटक क्षेत्र से आगे महू-नीमच हाईवे पर स्थित पहलवान बाबा की दरगाह को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान हिन्दू संगठन एवं समस्त हिन्दू समाज जिला रतलाम के प्रतिनिधियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि शासकीय भूमि सर्वे क्रमांक 104 पर स्थित पहलवान बाबा की दरगाह के आसपास अवैध रूप से पक्का निर्माण कर क्षेत्रफल बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही आगामी 13, 14 और 15 मई को प्रस्तावित उर्स एवं कव्वाली कार्यक्रम पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई।
ज्ञापन में बताया गया कि जावरा फाटक से आगे महू-नीमच हाईवे मार्ग पर स्थित यह दरगाह पूर्व में भी प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में रह चुकी है। संगठन का कहना है कि हाईवे निर्माण के दौरान शासन-प्रशासन ने दरगाह के आसपास किए गए अतिक्रमण को हटाया था और केवल लगभग 5 बाय 5 फीट का मूल स्थल ही शेष रखा गया था। उस समय किसी प्रकार का पक्का निर्माण, जाली या ओटला नहीं था। बाद में हाईवे निर्माण पूर्ण हुआ और यातायात सुचारु रूप से प्रारंभ हो गया।
अब हिन्दू संगठनों ने आरोप लगाया है कि विगत कुछ दिनों से कुछ लोगों द्वारा योजनाबद्ध तरीके से पुनः शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर दरगाह का क्षेत्रफल बढ़ाया जा रहा है। ज्ञापन के अनुसार मुख्य सड़क के दोनों ओर लगभग 25 से 30 फीट तक लोहे की जालियां लगाकर शेड बनाया गया है तथा पक्का निर्माण कार्य जारी है।
संगठन का आरोप है कि यह सब बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के किया जा रहा है और हाईवे की भूमि पर कब्जा बढ़ाने का प्रयास है।
हिन्दू समाज ने यह भी कहा कि संबंधित मामला न्यायालय में विचाराधीन है। तृतीय व्यवहार न्यायाधीश रतलाम की अदालत में प्रकरण क्रमांक आरसीएसए 337/2024 लंबित है, जिसकी अगली सुनवाई 16 जून 2026 को निर्धारित है। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहना गंभीर प्रश्न खड़े करता है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि न्यायालयीन प्रक्रिया के बीच दरगाह का विस्तार कर स्थिति को स्थायी रूप देने की कोशिश की जा रही है।
सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा सुरक्षा और यातायात का उठाया गया। ज्ञापन में कहा गया कि दरगाह महू-नीमच हाईवे के बीच स्थित है, जहां दिन-रात भारी वाहनों सहित हजारों वाहन गुजरते हैं। ऐसे में सड़क किनारे और मार्ग के पास अतिक्रमण बढ़ने से दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है। यदि यहां बड़े स्तर पर उर्स, कव्वाली या अन्य धार्मिक आयोजन किए जाते हैं तो भीड़ के कारण गंभीर हादसा हो सकता है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि कुछ वर्षों से दरगाह को चमत्कारी बताकर आमजन में प्रभाव बढ़ाया जा रहा है और इसी के नाम पर धीरे-धीरे आसपास का क्षेत्र कब्जे में लिया जा रहा है।
हिन्दू संगठनों ने प्रशासन से मांग की कि दरगाह के आसपास किए गए कथित अवैध निर्माण की तत्काल जांच कराई जाए, पक्का निर्माण और अतिक्रमण को हटाया जाए तथा संबंधित व्यक्तियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
संगठनों ने विशेष रूप से 13, 14 और 15 मई को प्रस्तावित उर्स और कव्वाली कार्यक्रम को जनहित और कानून व्यवस्था के मद्देनजर तत्काल निरस्त करने की मांग रखी है। साथ ही भविष्य में भी इस स्थल पर किसी प्रकार के आयोजन की अनुमति नहीं देने की अपील की गई है।
जनसुनवाई में सौंपे गए इस ज्ञापन के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस संवेदनशील मामले में क्या कदम उठाता है। शहर में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज है और आगामी दिनों में प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
रिपोर्टर जितेंद्र कुमावत