रतलाम / बाजना
रतलाम जिले के बाजना विकासखंड में मंगलवार को आशा कार्यकर्ताओं और आशा सुपरवाइजरों का गुस्सा खुलकर सामने आया। पिछले चार माह से लंबित मानदेय को लेकर पूरे क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता एकजुट होकर बाजना अस्पताल परिसर पहुंचीं और जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में पहुंचीं आशा कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक लंबित भुगतान नहीं होगा, तब तक कोई भी आशा कार्यकर्ता फील्ड में जाकर काम नहीं करेगी।
प्रदर्शन को समर्थन देने पहुंचे जिला पंचायत उपाध्यक्ष केशूराम निनामा ने पूरे आंदोलन की कमान संभाली और मौके पर प्रशासनिक अधिकारियों से तीखी चर्चा की। उन्होंने साफ कहा कि आशा कार्यकर्ताओं का 4 माह से वेतन रोकना न केवल अमानवीय है बल्कि शासन के नियमों के खिलाफ भी है। निनामा ने जिला स्वास्थ्य अधिकारी और ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर को 7 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि तय समय में भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र होगा।
प्रदर्शन के दौरान एक बड़ा मुद्दा यह भी सामने आया कि बाजना के बीएमओ डॉ. जितेंद्र जैसवाल मौके पर अनुपस्थित मिले, जिससे आशा कार्यकर्ताओं में और नाराजगी बढ़ गई। कई कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि बीएमओ अक्सर कार्यालय से अनुपस्थित रहते हैं, जिससे कर्मचारियों की समस्याएं लगातार लंबित रहती हैं। हालांकि बताया गया कि बीएमओ कोर्ट संबंधी कार्य से रतलाम गए थे और उन्होंने डॉ. संजय (संजू) वर्मा को प्रभार देकर आवेदन स्वीकार करने के निर्देश दिए थे।
डॉ. संजय वर्मा ने कहा
ये सभी हमारे ब्लॉक की आशा कार्यकर्ताएँ हैं, जिनका पिछले चार माह से वेतन लंबित है। इसी कारण ये सभी एकत्रित होकर ज्ञापन देने आई हैं और इन्होंने अनिश्चित हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। इनकी सभी मांगें उच्च अधिकारियों — BMO, CMHO — तक पहुंचाई जाएंगी और जल्द समाधान का प्रयास किया जाएगा।”
जब पूछा गया कि भुगतान कितने समय से अटका है, तो डॉ. वर्मा ने स्पष्ट कहा
चार महीने से भुगतान बाकी है
जानकारी के अनुसार, बाजना और सैलाना विकासखंड की कुल 530 आशा कार्यकर्ता और सुपरवाइजर इस समस्या से प्रभावित हैं। इनमें बाजना की 276 आशा कार्यकर्ता और 23 सुपरवाइजर, जबकि सैलाना की 220 आशा कार्यकर्ता और 11 सुपरवाइजर शामिल हैं। जनवरी से अप्रैल 2026 तक का मानदेय नहीं मिलने से कई परिवार आर्थिक संकट में आ गए हैं।
इस मामले को लेकर केशूराम निनामा ने कलेक्टर रतलाम को भी लिखित ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में उन्होंने उल्लेख किया कि वित्त विभाग के आदेश अनुसार किसी भी कर्मचारी का भुगतान 60 दिन से अधिक रोकना गैरकानूनी है, जबकि यहां 120 दिन से अधिक समय बीत चुका है। उन्होंने मांग की कि 7 दिवस के भीतर एकमुश्त भुगतान कराया जाए तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे गांव-गांव जाकर टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की देखरेख, परिवार कल्याण, बच्चों के स्वास्थ्य और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं को लागू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कोरोना काल से लेकर आज तक लगातार सेवाएं देने के बावजूद यदि उनका मेहनताना समय पर नहीं मिलता, तो यह अन्याय है।
बाजना में हुए इस प्रदर्शन ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि 7 दिन के भीतर भुगतान होता है या आंदोलन और बड़ा रूप लेता है।