रतलाम
रतलाम शहर सहित जिलेभर में इन दिनों भीषण जल संकट गहराता जा रहा है। नगर के कई क्षेत्रों में एक-दो दिन छोड़कर पानी सप्लाई की जा रही है, जबकि कुछ कॉलोनियों में हालात इतने खराब हैं कि कई दिनों तक नलों में पानी नहीं आता। रुद्राक्ष गोल्ड सहित कई कॉलोनियों के रहवासी पानी के लिए परेशान हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी समस्या से बेखबर नजर आ रहे हैं।
गर्मी बढ़ने के साथ जिले में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। मार्च और अप्रैल माह में जिले का जलस्तर करीब पौने एक मीटर तक गिर चुका है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि अब तक जिले के 773 हैंडपंप सूख चुके हैं। आने वाले दिनों में जलस्तर और गिरने की आशंका जताई जा रही है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हालात और भयावह हो सकते हैं।
एक ओर शहर की जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है, वहीं दूसरी ओर नगर निगम की लापरवाही खुलेआम दिखाई दे रही है। वीआईपी नगर स्थित शीतला माता मंदिर के पास बनी टंकी से हजारों गैलन पानी लगातार बहता देखा गया, लेकिन इसे रोकने वाला कोई नजर नहीं आया। सवाल यह उठता है कि जब पानी बचाने की अपील आम जनता से की जा रही है, तब निगम खुद पानी की बर्बादी क्यों नहीं रोक पा रहा?
बाजना सहित जिले की कई तहसीलों में चार से पांच दिन में एक बार पानी सप्लाई हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति तो और भी चिंताजनक बताई जा रही है। गांवों में पंचायत कार्यालयों पर ताले लटके रहते हैं और कई सरपंच-सचिव मुख्यालय से गायब रहते हैं। ग्रामीणों की समस्याएं सुनने वाला कोई नहीं है।
यदि प्रशासन और नगर निगम ने जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में रतलाम जिले के लोगों को पानी के लिए बड़ा संघर्ष करना पड़ सकता है।
रिपोर्ट- ईश्वर टांक
रिपोर्टर : जितेंद्र कुमावत