रतलाम
रतलाम जिले के ग्राम बंजली में सैलाना रोड पर स्थित सरकारी भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर बनाई गई हजरत मस्ताना शाह बाबा दरगाह (एरोड्रम इंदौर वाले बाबा/एरोड्रम रतलाम वाले बाबा) का मामला अब पूरे जिले में तूफान खड़ा कर रहा है। स्थानीय नागरिक नरेन्द्र उर्फ बंटी शर्मा ने जिलाधिकारी रतलाम को विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा है, जिसमें RTI दस्तावेजों के साथ साफ-साफ साबित किया गया है कि यह दरगाह पूरी तरह अवैध है और सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर बनाई गई है।
शिकायतकर्ता नरेन्द्र शर्मा निवासी नगर धामनोद, ने आरोप लगाया है कि कुछ लोगों ने शासन-प्रशासन को गुमराह कर इस जगह पर दरगाह का निर्माण किया और अब यहां उर्स, कव्वाली जैसे कार्यक्रम आयोजित कर आमजन को भ्रमित किया जा रहा है। गुरुवार को यहां टोने-टोटके, झाड़-फूंक का सिलसिला भी चल रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है।
RTI से खुलासा: पूरी भूमि शासकीय!
सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नरेन्द्र शर्मा ने 19 दिसंबर 2025 को आवेदन दायर किया था। ग्राम पंचायत बंजली के सचिव ने 20 जनवरी 2026 को स्पष्ट लिखा कि “उपरोक्त भूमि राजस्व विभाग की है। ग्राम पंचायत की भूमि में दरगाह मजार नहीं है।"
तहसीलदार रतलाम शहर ने 22 जनवरी 2026 को और भी गंभीर जानकारी दी। पटवारी रिपोर्ट के अनुसार:
सर्वे क्रमांक 44, रकबा 0.2000 हेक्टेयर भूमि शासकीय दर्ज है।
वर्ष 1956-57 के पुराने रिकॉर्ड में यह भूमि “नाकाबिल बरडी (चरनोई)” के रूप में शासकीय मद में दर्ज थी, रकबा 1 बीघा।
वर्तमान 2025-26 के खसरा में भी यही स्थिति बरकरार है।
यानी 70 साल से यह भूमि सरकारी है, फिर भी कुछ लोगों ने साजिश रचकर यहां मजार बना ली। शिकायत में कहा गया है कि यह अतिक्रमण दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है और आसपास के इलाके में भी कब्जे की कोशिशें हो रही हैं।
शिकायत पत्र में गंभीर आरोप
जिलाधिकारी को दिए गए पत्र में नरेन्द्र शर्मा ने लिखा है कि पहले यहां कोई कार्यक्रम नहीं होते थे, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग शासन को भ्रमित कर उर्स-कव्वाली आयोजित कर रहे हैं। आमजन को “चमत्कारी प्रभाव” बताकर भ्रमित किया जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि:
अवैध दरगाह को तुरंत हटाया जाए।
शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।
उर्स, कव्वाली या किसी भी प्रकार के धार्मिक कार्यक्रम की अनुमति न दी जाए।
दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
प्रतिलिपि अनुविभागीय अधिकारी, पुलिस अधीक्षक रतलाम और थाना प्रभारी औद्योगिक क्षेत्र को भी भेजी गई है।
क्या कहते हैं दस्तावेज?
खसरा दस्तावेजों में साफ है कि सर्वे नंबर 44 पर कोई निजी स्वामित्व या धार्मिक स्थल का रिकॉर्ड नहीं है। आसपास के अन्य सर्वे नंबर्स (42, 45/2, 41) पर निजी कृषकों के नाम हैं, लेकिन 44 पूरी तरह शासकीय है। RTI जवाब में तहसीलदार ने साफ कहा कि दरगाह के निर्माण, अनुमति, समिति या भूमि व्यपवर्तन (डायवर्सन) का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। यानी सब कुछ गैर-कानूनी तरीके से किया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी भूमि पर ऐसे अतिक्रमण न सिर्फ कानून का उल्लंघन हैं बल्कि विकास कार्यों में भी बाधा बन रहे हैं। रतलाम-सैलाना मार्ग पर स्थित यह जगह पेट्रोल पंप के पास होने के कारण आम आवागमन को भी प्रभावित कर रही है।
प्रशासन पर अब दबाव
यह मामला सिर्फ एक अतिक्रमण का नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर सरकारी भूमि हड़पने की साजिश का लग रहा है। यदि प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई नहीं की तो यह पूरे जिले में बुरा उदाहरण बन सकता है। जिलाधिकारी रतलाम से स्थानीय जनता की मांग है कि RTI दस्तावेजों के आधार पर तुरंत जांच कर अवैध निर्माण हटाया जाए और दोषी अधिकारियों/व्यक्तियों पर भी कार्रवाई हो, जिन्होंने इतने वर्षों तक इस अतिक्रमण को अनदेखा किया।
नरेन्द्र शर्मा ने अपनी शिकायत में लिखा है – “यह शासकीय भूमि पर षड्यंत्रपूर्वक अतिक्रमण है। इसे हटाकर भूमि को मूल स्वरूप में लाया जाए।”
अब देखना यह है कि रतलाम प्रशासन इस धमाकेदार खुलासे के बाद कितनी जल्दी और कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है। क्या अवैध दरगाह हटेगी? या फिर फिर से कोई “साम्प्रदायिक संवेदनशीलता” का हवाला देकर मामला दबा दिया जाएगा? पूरे इलाके की नजरें अब कलेक्टर कार्यालय और पुलिस पर टिकी हैं।
नोट: यह समाचार उपलब्ध दस्तावेजों और शिकायत पत्र के आधार पर तैयार किया गया है। प्रशासनिक जांच के बाद अंतिम सत्य सामने आएगा।
Crime reporter Jitendra Kumawat