सैलाना/बालाघाट। बैगा आदिवासी गांवों में बच्चों की मौत, बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था, पेयजल संकट और कथित भ्रष्टाचार को लेकर सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार द्वारा उठाई गई आवाज अब सरकार के दरवाजे तक पहुंच गई है। विधायक के बोंदरी-कोरकहा गांव के दौरे और वहां की जमीनी हकीकत सामने लाने के बाद सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया। शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अचानक बैगा गांव बोंदरी पहुंचे और ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं। मुख्यमंत्री के इस दौरे को आदिवासी अंचल में बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाक्रम माना जा रहा है।
सबसे बड़ा ऐलान मुख्यमंत्री ने माओवाद प्रभावित क्षेत्र के 100 गांवों के समग्र विकास के लिए 225 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत करने का किया। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि माओवाद के साये में रहने के कारण बैगा समाज विकास की दौड़ में पीछे रह गया है और अब सरकार उन्हें बराबरी पर लाने के लिए पूरी ताकत से काम करेगी।
डोडियार ने गांव-गांव जाकर खोली थी व्यवस्था की पोल!
इस पूरे मामले में सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार के दौरे के बाद सरकार की सक्रियता चर्चा में है। विधायक ने बोंदरी और कोरकहा गांव पहुंचकर ग्रामीणों की समस्याएं सामने रखी थीं। विधायक का आरोप था कि यहां लोग पत्थरों और पेड़ों की जड़ों से पानी निकालकर अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं। गंभीर रूप से बीमार बच्चों को अस्पताल तक पहुंचाने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
विधायक ने आंगनबाड़ी व्यवस्था, उचित मूल्य दुकानों से मिलने वाले राशन, पेयजल और विकास कार्यों के बजट में कथित भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि करीब 30 बच्चों की मौत और सैकड़ों लोगों के बीमार होने के बावजूद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया।
डोडियार ने सरकार से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने, गंभीर रूप से बीमार बच्चों को एम्स में बेहतर उपचार दिलाने और मामले के लिए जिम्मेदार मंत्रियों के इस्तीफे की मांग तक कर डाली थी।
मुख्यमंत्री के सामने खुली व्यवस्था की परतें
मुख्यमंत्री के बोंदरी दौरे में भी कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। जानकारी के अनुसार कुछ बच्चों को एक टीका लगने के बाद दूसरा टीका नहीं लगाया गया। वहीं 133 जनाधिकार पट्टे निरस्त किए जाने का मामला भी मुख्यमंत्री के सामने पहुंचा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने कलेक्टर को पूरे प्रकरण की जांच के निर्देश दिए। साथ ही मृत आठ बच्चों के परिवारों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
अब सवाल घोषणाओं के अमल का
मुख्यमंत्री का बैगा गांव पहुंचना और 100 गांवों के लिए 225 करोड़ रुपये की घोषणा निश्चित रूप से बड़ी पहल है, लेकिन अब असली परीक्षा जमीनी स्तर पर होगी। वर्षों से मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे बैगा परिवारों को अब उम्मीद है कि पेयजल, स्वास्थ्य, टीकाकरण, राशन, सड़क और अन्य विकास कार्यों की तस्वीर बदलेगी।
विधायक डोडियार द्वारा उठाए गए सवालों के बाद मुख्यमंत्री का सीधे गांव पहुंचना इस बात का संकेत है कि बैगा अंचल की समस्याएं अब प्रशासनिक फाइलों से निकलकर सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में पहुंच गई हैं। अब देखना होगा कि 225 करोड़ की यह बड़ी घोषणा बैगा गांवों की जमीन पर विकास की नई तस्वीर कितनी जल्दी खींचती है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत