रतलाम / सैलाना। वैदिक विचार मंच सैलाना के तत्वावधान में रविवार को ओशीन परिसर में आयोजित आर्ष विद्या कुलम् – शिक्षा संवाद कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय वैदिक प्रवक्ता आचार्य योगेशजी भारद्वाज ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर बेबाक विचार रखते हुए कहा कि आज भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती शिक्षा व्यवस्था की है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल डिग्री और रोजगार देने वाली शिक्षा पर्याप्त नहीं है बल्कि संस्कार चरित्र नैतिकता और राष्ट्रभावना से युक्त शिक्षा ही भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
कार्यक्रम का मूल संदेश शिक्षा से संवाद... संवाद से समाधान... समाधान से विकास...रहा। आचार्य भारद्वाज ने कहा कि भगवान श्रीराम श्रीकृष्ण और भगवान बुद्ध ने अपने-अपने युग की चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत किया था। आज के समय में शिक्षा की दिशा और स्वरूप को सुधारना ही राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा कार्य है। यदि शिक्षा सही होगी तो परिवार समाज और राष्ट्र भी सही दिशा में आगे बढ़ेंगे।
उन्होंने कहा कि आज बच्चों के हाथों में मोबाइल है जहां बिना किसी नियंत्रण के अश्लीलता नशे और अनैतिक सामग्री उपलब्ध है जिससे नई पीढ़ी के संस्कार प्रभावित हो रहे हैं। इसका प्रमुख कारण जीवन मूल्यों से रहित शिक्षा व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल फिजिक्स केमिस्ट्री बायोलॉजी गणित और तकनीकी ज्ञान ही नहीं बल्कि आदर्श पुत्र-पुत्री बनने माता-पिता का सम्मान करने परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने तथा राष्ट्र की संस्कृति एकता और सुरक्षा का महत्व भी सिखाया जाना चाहिए।
आचार्य भारद्वाज ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज का समाज अपनी पहचान के संकट से गुजर रहा है। लोग विदेशी संस्कृति और जीवनशैली को बिना परखे अपनाते जा रहे हैं जबकि अपनी वैदिक परंपरा वेद गोत्र ऋषि परंपरा और भारतीय ज्ञान परंपरा से दूर होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया की अच्छी बातें अवश्य अपनानी चाहिए लेकिन अंधानुकरण समाज को कमजोर बना देगा।
उन्होंने कहा कि शिक्षा तभी सार्थक है जब वह मनुष्य को अच्छा अपनाना और बुराई छोड़ना सिखाए। यदि बच्चों को संस्कार और सभ्यता नहीं सिखाई गई तो पारिवारिक व्यवस्था कमजोर होगी और वृद्धाश्रमों की संख्या लगातार बढ़ती जाएगी। शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी दिलाना नहीं बल्कि श्रेष्ठ नागरिक जिम्मेदार परिवार और सशक्त राष्ट्र का निर्माण करना होना चाहिए।
आचार्य भारद्वाज ने बताया कि उनकी टीम भारतीय स्वदेशी (Indigenous) शिक्षा नीति का प्रारूप तैयार करने पर कार्य कर रही है ताकि भारतीय संस्कृति नैतिक मूल्यों और आधुनिक आवश्यकताओं के समन्वय पर आधारित शिक्षा व्यवस्था विकसित की जा सके।
उन्होंने आगामी 4 अक्टूबर 2026 को दयाल वाटिका रतलाम में आयोजित होने वाले शिक्षा संवाद कार्यक्रम में अधिक से अधिक लोगों से भागीदारी का आह्वान किया। यह कार्यक्रम सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक आयोजित होगा जिसमें शिक्षा सुधार और भारतीय शिक्षा नीति पर व्यापक चर्चा की जाएगी।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षाविद सामाजिक कार्यकर्ता अभिभावक महिलाएं युवा पत्रकार तथा विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। वैदिक विचार मंच सैलाना एवं आयोजक शेखर राठौर (आर्य) एवं समस्त मित्र मंडल द्वारा आयोजित इस शिक्षा संवाद में भारतीय संस्कृति संस्कार और वैदिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता पर गंभीर मंथन हुआ।
उपस्थितजनों ने एक स्वर में माना कि राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए मूल्यपरक शिक्षा ही समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत