रतलाम। डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडेय शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय रतलाम में शनिवार को आयोजित जीवनधारा थैलेसीमिया शिविर ने सैकड़ों परिवारों के जीवन में नई उम्मीद जगा दी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन NHM के सहयोग से आयोजित इस विशाल शिविर में रतलाम सहित आसपास के 9 जिलों से 97 थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे और 250 से अधिक परिजन पहुंचे। पूरे दिन चले इस शिविर में बच्चों को केवल इलाज ही नहीं बल्कि आधुनिक चिकित्सा मानसिक परामर्श पोषण मार्गदर्शन फिजियोथेरेपी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट BMT की दिशा में महत्वपूर्ण जांच जैसी समग्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।
शिविर का शुभारंभ पद्मश्री डॉ. लीला जोशी के मुख्य आतिथ्य में हुआ। इस अवसर पर मेडिकल कॉलेज की अधिष्ठाता एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. अनीता मूथा अस्पताल अधीक्षक डॉ. प्रदीप मिश्रा सिविल सर्जन डॉ. अखंड प्रताप सिंह मेदांता अस्पताल गुरुग्राम के वरिष्ठ हीमैटोलॉजिस्ट डॉ. सत्य प्रकाश यादव मध्य प्रदेश थैलेसीमिया जनजागरण समिति के संरक्षक सत्येंद्र सिंह राठौर मार्गदर्शक गोविंद काकानी रेड क्रॉस सोसाइटी के प्रीतेश गादिया सेवा भारती के अनुज छाजेड़ स्वतंत्र पाटनी मोहित कसेरा थैलेसीमिया आइकॉन वर्षा पवार नितेंद्र आचार्य तथा बहन अवनी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
एक ही छत के नीचे मिली अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं
मेडिकल कॉलेज की पीडियाट्रिक्स टीम ने सभी 97 बच्चों और उनके भाई बहनों का विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया। रक्त जांच के नमूने लेकर रिपोर्ट सीधे परिजनों के मोबाइल पर SMS के माध्यम से भेजने की डिजिटल व्यवस्था की गई। जरूरतमंद बच्चों को आयरन चिलेशन सहित आवश्यक दवाइयां निःशुल्क वितरित की गईं।
बच्चों के बेहतर शारीरिक विकास के लिए फिजियोथेरेपी संतुलित आहार संबंधी विशेषज्ञ सलाह मनोवैज्ञानिक परामर्श तथा क्वालिटी ऑफ लाइफ मूल्यांकन जैसी सुविधाएं भी प्रदान की गईं। साथ ही भविष्य में थैलेसीमिया से प्रभावित बच्चों के जन्म को रोकने के लिए प्री नेटल स्क्रीनिंग और आनुवांशिक जांच के प्रति परिवारों को जागरूक किया गया। जिन बच्चों को आवश्यकता थी उनके लिए मौके पर ही दिव्यांगता प्रमाणपत्र की प्रक्रिया भी पूरी कराई गई।
बोन मैरो ट्रांसप्लांट की दिशा में ऐतिहासिक पहल
थैलेसीमिया के स्थायी उपचार की दिशा में मेदांता फाउंडेशन की विशेषज्ञ टीम ने महत्वपूर्ण पहल करते हुए 53 बच्चों एवं उनके परिजनों के कुल 102 HLA सैंपल एकत्र किए। इन जांचों से भविष्य में बोन मैरो ट्रांसप्लांट की संभावनाओं को मजबूती मिलेगी। शिविर में अंतरराष्ट्रीय संस्था PATH की ओर से डॉ. प्रतीक मोदी डॉ. मयंक जोशी और ओमप्रकाश प्रजापति ने भी सहयोग दिया।
इस दौरान बोन मैरो ट्रांसप्लांट के बाद पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी रही नन्हीं मनस्वी राव ने अपने अनुभव साझा करते हुए बच्चों और अभिभावकों का हौसला बढ़ाया तथा उपचार के प्रति सकारात्मक रहने का संदेश दिया।
इलाज के साथ मुस्कान भी बनी शिविर की पहचान
शिविर में बच्चों के मनोरंजन का भी विशेष ध्यान रखा गया। शेप स्टेशनरी के सहयोग से चित्रकला प्रतियोगिता मिकी माउस बाउंसी मूवी शो संगीत और मनोरंजक गतिविधियों का आयोजन किया गया। अस्पताल का वातावरण उत्साह और खुशियों से भर गया तथा मासूमों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई।
पूरी टीम ने निभाई अहम भूमिका
कार्यक्रम का सफल संचालन एवं समन्वय डॉ. ध्रुवेंद्र पांडे ने किया। शिविर की चिकित्सा एवं व्यवस्थाओं में डॉ. देवेंद्र नरगावे डॉ. महेश तलेले डॉ. सारिका बघेल डॉ. प्रतिभा बाई डॉ. आंचल डॉ. निशा अखाड़े मानसी मिश्रा डॉ. आर. सी. डामोर फिजियोथैरेपिस्ट गायत्री राठौड़ श्वेता गिरी पूजा भाटी वसुंधरा सिंह और डॉ. जितेंद्र जायसवाल सहित पूरी टीम ने सराहनीय योगदान दिया। नेशनल मेडिकोज़ ऑर्गेनाइजेशन NMO के 20 से अधिक एमबीबीएस विद्यार्थियों ने भी सेवा कार्यों में सक्रिय सहयोग किया।
मध्य प्रदेश थैलेसीमिया जनजागरण समिति के मार्गदर्शक गोविंद काकानी ने बताया कि प्रदेश के मंत्री एवं रतलाम शहर विधायक चैतन्य काश्यप वर्षों से थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए दिव्यांग प्रमाणपत्र रेलवे एवं बस पास जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा समय समय पर आर्थिक सहयोग देकर उनका मनोबल बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं।
शिविर के समापन पर मेडिकल कॉलेज की अधिष्ठाता एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. अनीता मूथा ने कहा कि हमारा उद्देश्य थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को केवल चिकित्सा सुविधा देना ही नहीं बल्कि उनके परिवारों को यह विश्वास दिलाना है कि वे इस संघर्ष में अकेले नहीं हैं। 9 जिलों से आए परिवारों का भरोसा हमारी पूरी टीम के समर्पण और सेवा का सबसे बड़ा प्रमाण है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत