रतलाम / सैलाना/सरवन
रतलाम जिले के तहसील सैलाना अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सरवन में आज स्वास्थ्य विभाग की एक बेहद गंभीर लापरवाही और संवेदनहीनता का मामला सामने आया है। हर सोमवार को गर्भवती महिलाओं को आयरन की ड्रिप (बोतल) लगाने के लिए तय किए गए विशेष दिन पर दूर-दराज के गांवों से आईं दर्जनों गर्भवती महिलाएं अस्पताल में डॉक्टरों और मैदानी स्टाफ का इंतजार करती रहीं, लेकिन घंटों बीत जाने के बाद भी उन्हें इलाज नसीब नहीं हुआ।
बेचारे ग्रामीण और गर्भवती महिलाएं आज सुबह सै इस कड़कती धूप और परेशानी में अस्पताल के चक्कर काटकर वापस लौटने को मजबूर हो गए।
हफ्ते में एक दिन का नियम उस दिन भी सीएचओ गायब
अस्पताल के सूत्रों और मौके से मिली जानकारी के अनुसार गर्भवती महिलाओं (एएनसी) को आयरन की बोतल लगाने के लिए सोमवार का दिन तय किया गया है। पहले यह सुविधा रोज़ मिलती थी जिसे बदलकर अब हफ्ते में सिर्फ एक दिन कर दिया गया है। इसके बावजूद आज सोमवार को ड्रिप लगाने वाले सीएचओ (CHO) और फील्ड स्टाफ अस्पताल से नवादद रहे। बताया जा रहा है कि सीएचओ स्टाफ किसी ट्रेनिंग या मीटिंग का हवाला देकर सामूहिक रूप से गायब है जिसकी पूर्व सूचना तक अस्पताल प्रबंधन ने आने वाले मरीजों को नहीं दी।
बीएमओ डॉ. रविंद्र डामोर सहित मुख्य डॉक्टर गायब केवल 5-6 जन का स्टाफ मौजूद
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब पता चला कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सरवन के बीएमओ (BMO) डॉ. रविंद्र डामोर भी किसी मीटिंग का कहकर अस्पताल में मौजूद नहीं थे। उनके अलावा अस्पताल में कोई दूसरा डॉक्टर भी ड्यूटी पर नहीं था जिससे पूरी व्यवस्था चरमरा गई।
अस्पताल में इस समय केवल 5 से 6 कर्मचारियों का स्टाफ (जिसमें फार्मासिस्ट आयुष फार्मासिस्ट और मेल स्टाफ नर्स शामिल हैं) मौजूद है, जो मरीजों को ड्रिप लगाने या डॉक्टरों जैसी आपातकालीन सेवाएं देने में असमर्थ है।
50 से अधिक महिलाएं खा रही हैं गोते नाइट ड्यूटी भी बंद
अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों के अनुसार सुबह से करीब 50 से अधिक गर्भवती महिलाएं अस्पताल पहुँची थीं। इनमें से कई महिलाएं बिना इलाज और बिना ड्रिप लगवाए ही निराश होकर अपने घरों को लौट गईं, जबकि दोपहर तक भी करीब 25 से 30 महिलाएं इस उम्मीद में अस्पताल परिसर में बैठी रहीं कि शायद कोई सुध लेने आ जाए।
स्थानीय सूत्रों का यह भी आरोप है कि सरवन अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा नाइट ड्यूटी (रात्रि कालीन सेवा) पूरी तरह बंद कर दी गई है। डॉक्टर अब यहाँ रात में रुकने के बजाय डेली अप-डाउन कर रहे हैं जिससे रात के समय आने वाले आपातकालीन मरीजों की जान पूरी तरह जोखिम में बनी हुई है।
अभाविप (ABVP) ने जताई गहरी नाराजगी आंदोलन की चेतावनी
सरवन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जो अव्यवस्था देखने को मिली है वह बेहद निंदनीय है। सुदूर वनांचल क्षेत्रों से करीब 50 से अधिक गर्भवती बहनें और माताएं इस भीषण गर्मी में केवल आयरन की ड्रिप लगवाने के लिए अस्पताल पहुँची थीं लेकिन बीएमओ डॉ. रविंद्र डामोर और पूरा जिम्मेदार स्टाफ गायब मिला। स्वास्थ्य विभाग आदिवासियों के स्वास्थ्य के साथ इस तरह का खिलवाड़ करना बंद करे। यदि जल्द ही सरवन अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया और गैर-जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।
— दिलीप खड़िया (भाग संयोजक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद सैलाना)
SSE न्यूज़ की रिपोर्टर ग्राउंड रिपोर्ट:
गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ का यह मामला बेहद गंभीर है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली महिलाओं को इस प्रकार परेशान करना प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता सबूत है। इस पूरे मामले में जब उच्च अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उनकी तरफ से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। देखना यह होगा कि इस घोर लापरवाही पर जिला प्रशासन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) क्या सख्त कार्रवाई करते हैं।
रिपोर्ट: जितेंद्र कुमावत