रतलाम : रतलाम जिले के पलसोड़ी क्षेत्र में विकास बनाम ग्रामीणों की लड़ाई ने हिंसक रूप ले लिया। प्रस्तावित मेगा इंडस्ट्रियल पार्क के लिए अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासन और पुलिस की टीम पर ग्रामीणों ने भारी पथराव कर दिया। स्थिति पूरी तरह बेकाबू होते ही पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागने पड़े। झड़प में तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए जबकि सरपंच छोटू मईडा समेत 20 से अधिक ग्रामीणों को हिरासत में ले लिया गया। पूरे क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर स्थिति को काबू में किया गया लेकिन तनाव अभी भी चरम पर है।
यह घटना सिर्फ एक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं बल्कि किसानों की ज़मीन उनकी आजीविका और भविष्य को लेकर लंबे समय से चले आ रहे आंदोलन का उबाल है। पलसोड़ी सहित आसपास के चार-पांच गांवों—जामथुन, बिबड़ोद, जुलवानिया, रामपुरिया और सरवनी खुर्द—की करीब 1700 हेक्टेयर भूमि (कुछ रिपोर्ट्स में 1370 हेक्टेयर शासकीय भूमि) को मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) मेगा इंडस्ट्रियल पार्क में शामिल कर रहा है। यहां कई बड़ी कंपनियां पहले ही प्लांट लगाने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी हैं लेकिन स्थानीय ग्रामीण इसे अपनी ज़मीन छीनने की साजिश मान रहे हैं।
आज शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे प्रशासनिक अधिकारी, भारी पुलिस फोर्स जेसीबी और बुलडोजर लेकर पलसोड़ी पहुंचे। जैसे ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू हुई आसपास के गांवों से सैकड़ों ग्रामीण जुट गए। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरू किया लेकिन बातचीत विफल होते ही माहौल बिगड़ गया।
दोपहर करीब 2 बजे अधिकारियों ने समझाने की कोशिश की लेकिन ग्रामीणों ने सात दिन का समय और कार्रवाई रोकने की मांग की।
सहमति न बनने पर पुलिस ने जुलवानिया सरपंच छोटू मईडा समेत 20 से ज्यादा लोगों को हिरासत में ले लिया। इसी दौरान कुछ लोगों ने पुलिस और प्रशासनिक टीम पर पथराव शुरू कर दिया। पत्थरों की बौछार से अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने हालात संभालने के लिए बल प्रयोग किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।
तीन पुलिसकर्मी इस झड़प में घायल हो गए। ग्रामीणों का आरोप है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे थे लेकिन असामाजिक तत्वों ने पथराव किया।
सरपंच छोटू मईडा ने बाद में बताया हम हाईकोर्ट में स्थगन के लिए आवेदन दे चुके थे। इसके बावजूद हमें हिरासत में लिया गया। हिरासत के बाद हमें दो वज्र वाहनों में बैठाकर दो घंटे तक रिंग रोड पर घुमाया गया।
ग्रामीण लंबे समय से इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि शासकीय भूमि पर वे वर्षों से खेती कर रहे हैं। परिवार की रोजी-रोटी इसी ज़मीन से चलती है। पलसोड़ी के हल्का नंबर-7 सर्वे नंबर-135 की 2.360 हेक्टेयर भूमि को शामिल करने की सूचना पर उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई थी। 10 जून तक आपत्ति मांगी गई थी। गुरुवार को SDM आर्ची हरित और तहसीलदार ऋषभ ठाकुर ने पंचायत भवन में बैठक बुलाई लेकिन ग्रामीण अड़े रहे।
उन्होंने साफ कहा— हमें रोजगार और प्लाट नहीं चाहिए हमें अपनी खेती चाहिए। ग्रामीणों का तर्क है कि अधिसूचना में देरी के कारण प्रक्रिया पहले ही निरस्त हो चुकी है।
MPIDC के अधिकारी राजेश राठौर ने बताया कि भूमि पूरी तरह शासकीय है और प्रभावितों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है लेकिन ग्रामीण इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं।
मध्य प्रदेश सरकार औद्योगिक विकास को नई रफ्तार दे रही है। MPIDC के तहत पलसोड़ी क्षेत्र को मेगा इंडस्ट्रियल पार्क बनाने का प्लान है। यहां बड़े-बड़े उद्योग लगेंगे रोजगार सृजन होगा जिला तरक्की करेगा। लेकिन स्थानीय स्तर पर यह सपना किसानों के लिए बुरा सपना बन गया है। वे दावा करते हैं कि सरकार उनकी उपजाऊ भूमि छीन रही है बिना उचित मुआवजे या पुनर्वास के।
यह पहली बार नहीं है जब भूमि अधिग्रहण को लेकर मध्य प्रदेश में तनाव हुआ हो। पूरे देश में किसान आंदोलनों की लहर में यह नया अध्याय जुड़ गया है। पलसोड़ी के ग्रामीण कहते हैं कि विकास का नाम लेकर उनकी संस्कृति परंपरा और आजीविका को कुचला जा रहा है। महिलाएं बच्चे और बुजुर्ग भी सड़क पर उतर आए थे। पथराव की घटना में शामिल होने वाले ज्यादातर युवा थे जिन्हें अपनी विरासत बचाने की चिंता सता रही है।
प्रशासन का कहना है कि सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है। भारी पुलिस बल की तैनाती से इलाके में तनावपूर्ण शांति है। हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ जारी है। पथराव की घटना की जांच हो रही है। वहीं विपक्षी दलों ने इस घटना को किसानों पर अत्याचार बताते हुए सरकार पर निशाना साधा है।
सरपंच छोटू मईडा का आरोप गंभीर है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट में याचिका लंबित है, फिर भी प्रशासन जबरन कार्रवाई कर रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज होगा। वे बड़े स्तर पर प्रदर्शन की तैयारी में हैं।
क्या होगा आगे?
यह घटना सिर्फ रतलाम तक सीमित नहीं। पूरे मध्य प्रदेश में भूमि अधिग्रहण से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स पर नजर है। औद्योगिक विकास जरूरी है लेकिन बिना स्थानीय लोगों की सहमति के यह विकास सस्टेनेबल नहीं हो सकता। सरकार को किसानों की चिंताओं को गंभीरता से लेना होगा—उचित मुआवजा, वैकल्पिक खेती की जमीन रोजगार गारंटी और पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन।
पलसोड़ी की यह जंग विकास मॉडल की परीक्षा है। क्या सरकार ग्रामीणों को साथ लेकर आगे बढ़ेगी या बल प्रयोग से रास्ता साफ करेगी? फिलहाल इलाके में भारी पुलिस फोर्स तैनात है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है। घायल पुलिसकर्मियों का इलाज चल रहा है। हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई या आगे की कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजर है।
यह बवाल सिर्फ शुरुआत हो सकती है। रतलाम का पलसोड़ी अब मध्य प्रदेश की सियासत और विकास बहस का नया केंद्र बन गया है।
ग्रामीणों की आवाज़ दबाई गई तो पूरे मालवा क्षेत्र में आग फैल सकती है। प्रशासन को संवाद का रास्ता चुनना होगा वरना यह निवेश क्षेत्र विवाद का क्षेत्र बनकर रह जाएगा।
रिपोर्टर : जितेन्द्र कुमावत