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वॉशिंगटन। ईरान-अमेरिका युद्ध का असर अब दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका पर साफ दिखाई देने लगा है। युद्ध के चलते अमेरिका में आर्थिक दबाव तेजी से बढ़ रहा है। महंगाई, तेल की कीमतों में उछाल और सैन्य खर्च बढ़ने से आम अमेरिकी नागरिकों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। ताजा आर्थिक रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका की आर्थिक वृद्धि दर (GDP Growth) में गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि युद्धजनित तनाव और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के कारण अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ रही है। तेल संकट ने बढ़ाई परेशानी ईरान और मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में अस्थिरता के चलते वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर अमेरिका में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ा है। कई राज्यों में ईंधन कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। महंगाई का खतरा बढ़ा अमेरिकी फेडरल रिजर्व और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संस्थाओं ने चेतावनी दी है कि यदि युद्ध लंबा चला तो अमेरिका में महंगाई और बढ़ सकती है। खाद्य पदार्थों, ऊर्जा और परिवहन सेवाओं की लागत बढ़ने से आम जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। युद्ध पर अरबों डॉलर खर्च रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका अब तक युद्ध और सैन्य अभियानों पर अरबों डॉलर खर्च कर चुका है। रक्षा बजट में लगातार वृद्धि से सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भविष्य में टैक्स और सरकारी कर्ज दोनों बढ़ सकते हैं। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव युद्ध के माहौल का असर अमेरिकी शेयर बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। रक्षा और ऊर्जा कंपनियों के शेयरों में तेजी आई है, जबकि एयरलाइन, ट्रैवल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर दबाव में दिखाई दे रहे हैं। निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। विशेषज्ञों की चेतावनी आर्थिक जानकारों का कहना है कि यदि युद्ध जल्द नहीं रुका तो अमेरिका में: - पेट्रोल और डीजल की कीमतें और बढ़ सकती हैं - ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं - बेरोजगारी बढ़ सकती है - आम लोगों की खरीद क्षमता कमजोर पड़ सकती है विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हालात लंबे समय तक बिगड़े रहे तो अमेरिका को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है। |