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चीताखेड़ा । भीषण गर्मी के इस दौर में जहां इंसानों का हाल बेहाल है, वहीं बेजुबान पक्षियों के लिए भी जीवन संकट खड़ा हो गया है। ऐसे समय में चीताखेड़ा क्षेत्र की सामाजिक संस्था नर सेवा नारायण सेवा समिति मानवता और संवेदनशीलता की मिसाल पेश कर रही है। संस्था पिछले 7 वर्षों से लगातार पक्षियों के लिए दाना-पानी अभियान चलाकर उनकी भूख और प्यास बुझाने का सराहनीय कार्य कर रही है। संस्था के वरिष्ठ सदस्य सत्यनारायण गुर्जर ने बताया कि बढ़ती गर्मी और पानी की कमी के कारण हर साल बड़ी संख्या में गौरैया, चिड़िया और कबूतर जैसे पक्षी दम तोड़ देते हैं। इसी चिंता को देखते हुए समिति द्वारा वर्षभर प्रतिदिन पक्षियों के लिए दाना और पानी की व्यवस्था की जाती है। उन्होंने कहा कि बेजुबान पक्षी अपनी प्यास और भूख व्यक्त नहीं कर सकते, इसलिए उनकी सहायता करना समाज का कर्तव्य है। संस्था के नरेश पाटीदार ने क्षेत्रवासियों से अपील करते हुए कहा कि हर व्यक्ति अपने घर की छत, आंगन या बालकनी में मिट्टी के बर्तन में पानी और बाजरा, ज्वार, चावल या रोटी के टुकड़े जरूर रखें। उनका कहना है कि छोटा सा प्रयास भी किसी बेजुबान की जान बचा सकता है। समिति के कार्यकर्ता गांव-गांव और मोहल्लों में जाकर लोगों को इस मुहिम से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। संस्था द्वारा लोगों को सकोरे भी वितरित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही बाजार, बस स्टैंड और सार्वजनिक स्थानों पर बड़े पानी के बर्तन रखे जा रहे हैं, जिनकी देखरेख स्वयंसेवक प्रतिदिन करते हैं। स्कूलों में भी बच्चों को पक्षियों के प्रति दया और संवेदनशीलता का संदेश दिया जा रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार 42 से 43 डिग्री तापमान में छोटी चिड़ियां 2 से 3 घंटे से अधिक बिना पानी के जीवित नहीं रह सकतीं। ऐसे में घरों की छतों पर रखा पानी उनके लिए जीवनदान साबित होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि गौरैया जैसे पक्षी फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले हजारों कीड़ों को खाते हैं, इसलिए उनका संरक्षण पर्यावरण और खेती दोनों के लिए जरूरी है। मथुरा लाल पाटीदार ने लोगों से अपील की कि पानी रोज ताजा भरें और मिट्टी के बर्तन का उपयोग करें, क्योंकि वह पानी को ठंडा बनाए रखता है। वहीं नमकीन या बासी भोजन पक्षियों को नहीं देने की सलाह भी दी गई। आशीष बसेर ने बताया कि संस्था द्वारा बेजुबान पक्षियों को गर्मी, बारिश, ओलावृष्टि और कड़ाके की ठंड से बचाने के लिए लगभग 12 लाख रुपए की लागत से पक्षी टावर का निर्माण भी कराया गया है। रोज 20 किलो अनाज खिलाया जाता है पक्षियों को समिति के वरिष्ठ सदस्य दिनेश गुर्जर ने बताया कि संस्था पिछले 7 वर्षों से बिना किसी प्रचार-प्रसार के निस्वार्थ सेवा कर रही है। प्रतिदिन करीब 20 किलो ज्वार, बाजरा, मक्का, गेहूं और चावल पक्षियों को खिलाया जाता है तथा पीने के पानी की व्यवस्था भी की जाती है। एकादशी और पूर्णिमा पर पक्षियों के लिए विशेष भंडारा समिति के सत्यनारायण गुर्जर और रामसिंह जाट ने बताया कि प्रत्येक एकादशी और पूर्णिमा पर आटा, घी, शक्कर, खोपरा, बिस्कुट और काजू मिलाकर विशेष भोजन तैयार किया जाता है। समिति के सदस्य उन स्थानों पर जाकर पक्षियों को यह भंडारा कराते हैं, जहां बड़ी संख्या में चिड़ियों का बसेरा होता है। यह सेवा पिछले पांच वर्षों से लगातार जारी है। आमजन के लिए भी लगाए तीन वाटर कूलर संस्था केवल पक्षियों की ही नहीं, बल्कि आमजन की सेवा में भी लगी हुई है। चीताखेड़ा गांव में अलग-अलग तीन स्थानों पर शीतल पेयजल हेतु वाटर कूलर लगाए गए हैं, ताकि राहगीरों और ग्रामीणों को भीषण गर्मी में राहत मिल सके। रिपोर्ट : दशरथ माली |