रतलाम
रतलाम जिले के आलोट क्षेत्र में एक पटवारी की संदिग्ध मौत ने अब एक बड़े जनांदोलन का रूप ले लिया है। खजूरी देवड़ा में पदस्थ पटवारी रविशंकर खराड़ी की सुसाइड मामले में अब कर्मचारी संगठनों ने सीधे तौर पर नायब तहसीलदार सविता राठौर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को कलेक्ट्रेट परिसर नारों की गूँज और आक्रोश से थर्रा उठा, जहाँ सैकड़ों की संख्या में कर्मचारियों ने अपनी एकजुटता दिखाते हुए इंसाफ की गुहार लगाई।
कलेक्ट्रेट में एडीएम को सौंपा ज्ञापन
दोपहर के वक्त जिले भर के पटवारी और विभिन्न कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी पुराने कलेक्ट्रेट स्थित गुलाब चक्कर पर एकत्रित हुए। यहाँ से एक विशाल रैली निकाली गई, जो विरोध प्रदर्शन करते हुए नए कलेक्ट्रेट पहुँची। कर्मचारियों का गुस्सा सातवें आसमान पर था।
एडीएम डॉ. शालिनी श्रीवास्तव को ज्ञापन सौंपते हुए कर्मचारी नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि व्यवस्था द्वारा की गई संस्थानिक हत्या है। उन्होंने नायब तहसीलदार सविता राठौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने (IPC 306) का मामला दर्ज करने की पुरजोर मांग की।
7 दिन का अल्टीमेटम: काम बंद बस्ता बंद
पटवारी संघ ने प्रशासन को खुली चेतावनी दी है कि यदि 7 दिनों के भीतर दोषी अधिकारी के खिलाफ FIR दर्ज नहीं की गई, तो जिले भर के पटवारी अपने बस्ते जमा कर देंगे और अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। पटवारी कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण पाटीदार ने गर्जना करते हुए कहा, हम अपने साथी को खो चुके हैं, अब और प्रताड़ना बर्दाश्त नहीं होगी। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन इतना उग्र होगा कि प्रशासन को संभालना मुश्किल हो जाएगा।
सुसाइड नोट ने खोली प्रताड़ना की पोल
सूत्रों के अनुसार, मृतक रविशंकर खराड़ी के घर से बरामद पत्र में बेहद गंभीर खुलासे हुए हैं। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि नायब तहसीलदार द्वारा पटवारी पर कार्य का अत्यधिक मानसिक दबाव बनाया जा रहा था। इतना ही नहीं, उन पर गलत बटांकन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए अनैतिक दबाव डाला गया। इसी मानसिक प्रताड़ना से टूटकर एक ईमानदार कर्मचारी ने मौत को गले लगा लिया।
जितेंद्र परमार की बहाली की मांग
विरोध प्रदर्शन में एक और मुद्दा प्रमुखता से उठा। आरोप है कि एक अन्य पटवारी जितेंद्र परमार को भी इसी तरह प्रताड़ित कर निलंबित किया गया है। कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि जितेंद्र परमार को तत्काल बहाल किया जाए और दमनकारी नीतियों पर रोक लगाई जाए।
निष्कर्ष: सुलगता सवाल
क्या एक राजस्व अधिकारी का दबाव इतना बढ़ सकता है कि अधीनस्थ कर्मचारी को अपनी जीवनलीला समाप्त करनी पड़े? आलोट की इस घटना ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नज़रें प्रशासन के अगले 7 दिनों के कदम पर टिकी हैं। क्या पटवारी रविशंकर को न्याय मिलेगा, या यह मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
Crime reporter Jitendra Kumawat