रतलाम
रतलाम जिले के नामली थाना हवालात में हाल ही में हुई आत्महत्या की घटना ने गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। इस मामले को लेकर सेवानिवृत्त पुलिस अधीक्षक, लेखक एवं चिंतक आर.सी. पंवार ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए इसे अत्यंत चिंताजनक बताया है। “आत्महत्या क्यों” विषय पर पुस्तक लिख चुके पंवार ने वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र त्रिवेदी से चर्चा में कहा कि हिरासत में किसी व्यक्ति की मृत्यु होना केवल पुलिस विभाग ही नहीं, बल्कि सभ्य समाज और संपूर्ण शासन-प्रशासन के लिए भी एक कलंक के समान है।
पंवार ने बताया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, जो 1 जुलाई 2024 से लागू हुई है, के तहत धारा 56 में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति की सुरक्षा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी पुलिस की होती है। धारा 49 के अनुसार गिरफ्तारी से पहले आरोपी की तलाशी लेना अनिवार्य है, ताकि उसके पास कोई ऐसी वस्तु न हो जिससे वह स्वयं या अन्य को नुकसान पहुंचा सके। वहीं धारा 51, 52 और 53 के अंतर्गत मेडिकल परीक्षण कराना, परिजनों को सूचना देना तथा गिरफ्तारी का कारण बताना आवश्यक प्रावधान हैं, जिससे आरोपी के जीवन के अधिकार सुरक्षित रह सकें।
उन्होंने कहा कि केंद्र व राज्य शासन, सर्वोच्च न्यायालय और मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं। पंवार के अनुसार, पिछले 6 वर्षों में हिरासत में मृत्यु के मामलों में लगभग 45.3 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। इनमें फांसी लगाकर आत्महत्या के मामले अधिक सामने आए हैं, जहां जूते के फीते, चादर के टुकड़े, लोअर या साड़ी के फंदे का उपयोग किया गया। उन्होंने बताया कि हवालात के शौचालय ऐसे मामलों के लिए संवेदनशील स्थान बनते जा रहे हैं, जबकि बैरक की खिड़की, गेट और पंखे के हुक से जुड़े करीब 27 प्रतिशत मामले सामने आए हैं।
इसके अलावा उपचार के दौरान लगभग 11 प्रतिशत मामलों में हृदयाघात से मृत्यु के प्रकरण भी दर्ज किए गए हैं। प्रदेश स्तर पर नरसिंहपुर जिले में लगभग 17 प्रतिशत हिरासत मृत्यु के मामले सामने आए हैं।
पंवार ने कहा कि यदि कानून और न्यायालय के दिशा-निर्देशों का ईमानदारी से पालन किया जाए और हवालात में सुरक्षा व्यवस्थाओं को अधिक सुदृढ़ बनाया जाए, तो इस प्रकार की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। उन्होंने अपनी पूर्व प्रकाशित पुस्तक “न्याय कहां” (पृष्ठ 33 से 37) का उल्लेख करते हुए बताया कि इसमें हिरासत में मृत्यु रोकने के उपायों का विस्तार से वर्णन किया गया है।
अंत में उन्होंने उम्मीद जताई कि पुलिस प्रशासन भविष्य में और अधिक सतर्कता बरतेगा तथा आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाकर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने का प्रयास करेगा।
रिपोर्टर - जितेंद्र कुमावत