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चीताखेड़ा । मैडम जी हमारे यहां का मास्टर बच्चों को पढ़ाता नहीं है, पूरे दिन बस मोबाइल में लगा रहता है। मास्टरनी तो अच्छा पढ़ाती हैं, लेकिन इस मास्टर के चक्कर में हमारे बच्चों का भविष्य अंधकार में जा रहा है। इसे तुरंत बदलिए, वरना हम अपने बच्चों का दाखिला दूसरे गांव के स्कूल में करा देंगे। यह आक्रोश शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चीताखेड़ा संकुल अंतर्गत आने वाले प्राथमिक विद्यालय रामनगर के ग्रामीणों का था, जो जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) श्रीमती ऐश्वर्या मुंदड़ा और विकास खंड स्त्रोत समन्वयक (BRC) योगेश कंडारा के औचक निरीक्षण के दौरान फूट पड़ा। *पेड़ की छांव में लगी शिक्षा चौपाल* अधिकारियों ने स्कूल पहुंचते ही मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलन व माल्यार्पण किया। ग्रामीणों ने अधिकारियों का स्वागत किया और परिसर में पौधरोपण भी किया गया। इसके बाद डीईओ श्रीमती ऐश्वर्या मुंदड़ा ने औपचारिकताएं छोड़कर सीधे नीम के पेड़ के नीचे ग्रामीणों की चौपाल लगा दी। निरीक्षण के दौरान जब डीईओ ने बच्चों के पास बैठकर उनका शैक्षिक स्तर परखा, तो स्थिति चिंताजनक और कमजोर पाई गई। कक्षा में कई बच्चे बिना दाखिले के और कुछ आंगनवाड़ी केंद्र के बैठे मिले। *शिक्षक पर गिरी गाज, समस्याओं के समाधान के निर्देश* चौपाल में लामबंद ग्रामीणों ने एक सुर में शिक्षक की लापरवाही और कार्यप्रणाली पर कड़ा रोष जताया। ग्रामीणों की मांग और बच्चों के गिरते शैक्षिक स्तर को देखते हुए डीईओ ने तत्काल शिक्षक व्यवस्था में बदलाव का भरोसा दिया। चौपाल में स्कूल से जुड़ी अन्य बुनियादी समस्याओं पर भी त्वरित निर्णय लिए गए। रिक्त पड़े किचन कक्ष की मरम्मत कराकर आंगनवाड़ी केंद्र को स्कूल परिसर में शिफ्ट करने की सहमति दी गई। इसके लिए पंचायत सचिव नवीन पाटीदार को निर्देशित किया गया। स्कूल की बाउंड्रीवॉल और पेयजल संकट के स्थायी समाधान का आश्वासन दिया गया।डीईओ ने ग्रामीणों से कहा कि स्कूल और बच्चों की सुरक्षा में गांव वालों की भी अहम भागीदारी है, इसलिए सभी सहयोग करें। इनका कहना है ग्रामीण शिक्षक की कार्यप्रणाली से असंतुष्ट थे और बच्चों का स्तर भी ठीक नहीं मिला। ग्रामीणों की शिकायत और बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए यहां वैकल्पिक शिक्षक की व्यवस्था की जा रही है। श्रीमती ऐश्वर्या मुंदड़ा, जिला शिक्षा अधिकारी, नीमच |