रतलाम। मध्यप्रदेश के विभिन्न पेंशनर संगठनों के संयुक्त आह्वान पर प्रमुख पेंशनर्स एसोसिएशन रतलाम के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पेंशनर गुरुवार को अपनी लंबे समय से लंबित 12 सूत्रीय मांगों को लेकर जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। पेंशनरों ने अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी करते हुए शासन का ध्यान आकर्षित किया। प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश शासन के नाम संबोधित ज्ञापन कलेक्टर के अधीनस्थ नायब तहसीलदार आर.सी. पांडे को सौंपा गया।
पेंशनर संगठनों ने कहा कि उनकी कई महत्वपूर्ण मांगें लंबे समय से शासन स्तर पर लंबित हैं। पूर्व में मुख्यमंत्री द्वारा पेंशनरों को केंद्र के समान समय-समय पर महंगाई राहत देने की घोषणा की गई थी, लेकिन पेंशनरों का कहना है कि केंद्र की तिथि से महंगाई राहत का नियमित भुगतान अभी भी पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हुआ है।
प्रमुख पेंशनर्स एसोसिएशन के ज्ञापन में जुलाई 2019 से केंद्र की तिथि के अनुसार महंगाई राहत का नियमित भुगतान, जुलाई 2019 से दिसंबर 2025 तक के 90 माह के बकाया एरियर, जुलाई 2025 के 3 प्रतिशत एरियर, जनवरी 2026 से 2 प्रतिशत राहत तथा जुलाई 2026 से 3 प्रतिशत राहत का भुगतान करने की मांग की गई है।
इसके साथ ही जबलपुर हाईकोर्ट के 31 अक्टूबर 2025 के निर्णय के अनुसार छठे वेतन आयोग के 1 जनवरी 2006 से 31 अगस्त 2008 तक के 32 माह के एरियर का 6 प्रतिशत ब्याज सहित भुगतान करने की मांग भी उठाई गई।
पेंशनरों ने सातवें वेतन आयोग के पूर्व के पेंशनरों के लिए केंद्र सरकार के 12 मई 2017 के परिपत्र के अनुसार काल्पनिक वेतन निर्धारण कर 1 जनवरी 2016 से 31 मार्च 2018 तक के 27 माह के एरियर का भुगतान, शासकीय कर्मचारियों एवं पेंशनरों के लिए निःशुल्क उपचार व्यवस्था तथा जिला एवं संभाग स्तर पर पेंशन कार्यालय पुनः स्थापित करने की मांग रखी।
ज्ञापन में 65 वर्ष की आयु पर 5 प्रतिशत, 70 वर्ष पर 10 प्रतिशत, 75 वर्ष पर 15 प्रतिशत तथा 80 वर्ष की आयु के प्रारंभ से 20 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन देने, विद्युत मंडल के पेंशनरों को पेंशन की गारंटी देने, 35 वर्ष सेवा पूर्ण कर चुके सेवानिवृत्त कर्मचारियों को चतुर्थ समयमान वेतनमान का लाभ देने तथा पेंशन सारांशीकरण की अवधि 15 वर्ष से घटाकर 11 वर्ष 9 माह करने की मांग भी शामिल है।
इसके अलावा शिक्षकों को पात्रतानुसार अर्जित अवकाश के नगदीकरण का लाभ देने, पेंशनर्स कल्याण मंडल, पेंशनर्स फोरम एवं संभागीय स्वास्थ्य एवं चिकित्सा समितियों का गठन कर नियमित बैठकें आयोजित करने तथा एनपीएस और यूपीएस के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) लागू करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।
पेंशनर नेताओं ने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने अपने सेवाकाल में शासन और समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसलिए उनकी जायज मांगों का समयबद्ध निराकरण शासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो पेंशनर संगठन लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगे। साथ ही संगठन ने शासन से पारस्परिक चर्चा के माध्यम से समस्याओं के समाधान के लिए समय एवं तिथि निर्धारित करने का आग्रह किया है।
प्रदर्शन में प्रमुख रूप से प्रमुख पेंशनर संगठन के अध्यक्ष इलियास कुरैशी, प्रांतीय उपाध्यक्ष एस.एन. सोढ़ा, प्रांतीय सचिव एम.के. व्यास, सैलाना तहसील अध्यक्ष बरकत अली काजी, जावरा तहसील अध्यक्ष सालार हुसैन बादशाह, शिवगढ़ ब्लॉक अध्यक्ष कैलाश चंद्र वाघेला, अनीश खान, जी.के. शर्मा, करूणेन्द्र बाथम, ओ.पी. सक्सेना, महेंद्र मालवीया, लालसिंह चौहान, दिनेश भटनागर, एस. नागर, बी.एस. चौहान, विपेन्द्र कुमार बोचरे, प्रवीण जोशी, एस.एस. डोडिया, गफ्फार मंसूरी, राजेंद्र रावल, आर.सी. चौहान सहित बड़ी संख्या में पेंशनर मौजूद रहे। ज्ञापन का वाचन पूर्व विकासखंड शिक्षा अधिकारी सैलाना नरेंद्र तिवारी ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन अध्यक्ष इलियास कुरैशी ने माना।
पेंशनरों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी मांगों के समाधान के लिए शासन से संवाद को तैयार हैं, लेकिन यदि लंबे समय से लंबित मुद्दों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत