रतलाम। प्रधानमंत्री आवास योजना के 208 फ्लैटों को खाली कराने की नगर निगम की कार्रवाई अब सवालों के घेरे में आ गई है। पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने 5 अगस्त को हुई कार्रवाई और नगर निगम द्वारा तैयार किए गए पंचनामे पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे पंचनामा नहीं बल्कि प्रपंचनामा करार दिया है।
उन्होंने सवाल किया कि यदि नगर निगम के अनुसार सभी 208 फ्लैट पूर्णतः खाली थे और किसी भी फ्लैट में घरेलू सामान फर्नीचर अथवा किसी व्यक्ति का कब्जा नहीं था तो फिर कार्रवाई के दौरान चार ट्रैक्टरों में भरकर घरेलू सामान और फर्नीचर रैन बसेरा में किसका भेजा गया?
सकलेचा ने कहा कि आज भी मल्टी के नीचे बरामदे में घरेलू सामान और फर्नीचर पड़ा हुआ है। ऐसे में नगर निगम के पंचनामे में फ्लैटों को पूरी तरह खाली बताए जाने पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। उन्होंने पूछा कि यदि किसी का कब्जा नहीं था तो फिर हितग्राहियों को नोटिस किस आधार पर दिए गए?
नोटिस किसके लिए चस्पा किए गए? जिन लोगों को फ्लैट आवंटित किए गए थे वे अपना सामान लेकर कहां गए और उन्हें फ्लैट छोड़ने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
पूर्व विधायक ने नगर निगम की नोटिस प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि 31 जुलाई को तीन दिवस का नोटिस चस्पा किया गया था। 1 और 2 अगस्त को शनिवार-रविवार होने के कारण तीन कार्य दिवस 5 अगस्त को पूरे होते थे। इसके बावजूद 3 अगस्त को ही फ्लैटों पर कब्जा लेने का कार्यालयीन आदेश जारी कर दिया गया।
इसके बाद 5 अगस्त को सुबह करीब 9 बजे फ्लैटों से सामान बाहर निकालकर ताले लगाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब हितग्राहियों को दी गई अवधि 5 अगस्त को पूरी होनी थी तो उससे पहले ही कब्जा लेने की प्रक्रिया क्यों शुरू की गई? वहीं कब्जा लेने के बाद 6 अगस्त को तारीख 15 दिन और 7 अगस्त को 24 दिन बढ़ाकर 31 अगस्त किए जाने पर भी उन्होंने सवाल खड़े किए। सकलेचा ने पूछा कि यह अवधि किस विधि अथवा नियम के तहत बढ़ाई गई?
एसडीएम और तहसीलदार की मौजूदगी पर भी सवाल
कार्रवाई के दौरान एसडीएम तहसीलदार और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी को लेकर भी पारस सकलेचा ने गंभीर प्रश्न उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या मौके पर पहुंचने से पहले अधिकारियों ने नगर निगम की प्रस्तावित कार्रवाई का विधिक अध्ययन किया था? क्या यह जांचा गया था कि नगर निगम को फ्लैट खाली कराने सामान बाहर निकलवाने और ताले लगाने का वैधानिक अधिकार प्राप्त था या नहीं?
सकलेचा ने सवाल किया कि विधि विरुद्ध कार्रवाई को अधिकारियों ने संरक्षण किसके आदेश से दिया?
उन्होंने कहा कि गरीब और दलित परिवारों के आवास से सामान बाहर निकालने तथा उन्हें बेदखल करने की कार्रवाई में करीब ढाई सौ नगर निगम अधिकारी-कर्मचारी और करीब डेढ़ सौ पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों के साथ एसडीएम एवं तहसीलदार की मौजूदगी महज प्रशासनिक शक्ति प्रदर्शन का विषय नहीं है बल्कि यह लोकतंत्र और संविधान की कसौटी पर परखी जाने वाली घटना है।
पूर्व विधायक ने पूरे मामले में नगर निगम की कार्रवाई उसकी नोटिस प्रक्रिया पंचनामे और अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग उठाते हुए कहा कि 208 फ्लैटों को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब अब नगर निगम और प्रशासन को देना चाहिए।
चार ट्रैक्टर सामान किसका था बरामदे में पड़ा सामान किसका है और जब फ्लैट खाली थे तो नोटिस किसे दिए गए — इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही पूरी कार्रवाई की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत