रतलाम। नगर निगम द्वारा 27 जनवरी 2023 के बाद खरीदे गए प्लॉटों के नामांतरण पर प्रस्तावित रोक को लेकर शहर में विरोध तेज हो गया है। पूर्व पार्षद एवं पूर्व एमआईसी सदस्य सीमा टांक ने नगर निगम आयुक्त को विस्तृत आवेदन सौंपकर इस निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने मांग की है कि नगर निगम इस संबंध में स्पष्ट और पारदर्शी आदेश जारी करे तथा निर्दोष प्लॉट खरीदारों के वैध अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे।
अपने आवेदन में सीमा टांक ने उल्लेख किया कि मध्यप्रदेश नगर पालिका (कॉलोनी विकास) नियम 2021 एवं वर्ष 2023 के संशोधित प्रावधानों का उद्देश्य नियमों का उल्लंघन करने वाले कॉलोनाइज़रों के विरुद्ध कार्रवाई करना है, न कि वैध रजिस्ट्री कराने वाले नागरिकों को परेशान करना।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि खरीदारों ने स्टाम्प शुल्क और पंजीयन शुल्क जमा कर विधिवत रजिस्ट्री कराई है, तो उनके नामांतरण पर रोक किस वैधानिक प्रावधान के तहत लगाई जा रही है।
आवेदन में यह भी मांग की गई है कि निगम स्पष्ट करे कि यह रोक केवल कॉलोनाइज़र के पास बचे प्लॉटों पर लागू होगी या उन सभी लोगों पर भी जिन्होंने कानूनी प्रक्रिया के तहत प्लॉट खरीदे हैं।
सीमा टांक ने कहा कि पूरे शहर में 61 ऐसी कॉलोनियां हैं, जिनमें हजारों प्लॉट हैं। यदि नामांतरण रोक दिया गया तो हजारों परिवारों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
सीमा टांक (पूर्व पार्षद एवं पूर्व एमआईसी सदस्य) बताया की
पूरे शहर में 61 कॉलोनियां हैं और इनमें हजारों प्लॉट हैं। मेरा केवल एक ही उद्देश्य है कि कार्रवाई कॉलोनाइज़र पर हो, जनता पर नहीं। अगर जनता पर कार्रवाई होगी तो सीमा टांक सड़कों पर उतर जाएगी। गरीब व्यक्ति अपनी पूरी जिंदगी की गाढ़ी कमाई लगाकर एक प्लॉट खरीदता है। उसका क्या दोष है? दोषी कॉलोनाइज़र हैं और वे अधिकारी हैं जिन्होंने अवैध कॉलोनियां बसने दीं। कार्रवाई उन्हीं पर होनी चाहिए। आज लोग मेरे पास आकर पूछ रहे हैं कि हमारा नामांतरण नहीं होगा तो हमारा क्या होगा। हजारों परिवार चिंता और सदमे में हैं।
सीमा टांक ने कहा कि जब शहर में अवैध कॉलोनियां विकसित हो रही थीं, तब नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे थे। यदि समय रहते नियमों का पालन कराया जाता तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती। उन्होंने कहा कि निगम को अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए दोषी कॉलोनाइज़रों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन वैध रजिस्ट्री कराने वाले निर्दोष खरीदारों को किसी भी प्रकार से परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नगर निगम ने इस मामले में स्पष्ट नीति जारी नहीं की और आम नागरिकों के नामांतरण पर रोक लगाई गई, तो हजारों प्लॉट खरीदारों के साथ मिलकर जनहित में आंदोलन किया जाएगा। उनका कहना है कि प्रशासन का दायित्व कानून का पालन कराने के साथ-साथ जनता के वैध अधिकारों की रक्षा करना भी है।
रिपोर्टर : जितेन्द्र कुमावत