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इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर: किसानों की किस्मत बदली, 60% विकसित जमीन के साथ विकास का नया मॉडल इंदौर/भोपाल। मध्यप्रदेश ने औद्योगिक विकास की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाते हुए इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के प्रथम चरण का भूमिपूजन किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे किसानों और प्रदेश के लिए “भाग्योदय का शंखनाद” बताते हुए कहा कि यह परियोजना विकास के नए द्वार खोलेगी। ....... किसानों के लिए गेमचेंजर मॉडल इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसानों को सिर्फ मुआवजा ही नहीं, बल्कि विकास में सीधी भागीदारी दी गई है। किसानों को जमीन के बदले 4 गुना मुआवजा साथ ही 60% विकसित भूखंड वापस वर्तमान मूल्यांकन में किसानों को करीब 650 करोड़ रुपये के प्लॉट यह मॉडल किसानों को भूमिहीन होने के बजाय दीर्घकालीन निवेशक बनाता है। --- इन्फ्रास्ट्रक्चर का नया हब कुल लागत: 2360 करोड़ रुपये लंबाई: 20.28 किमी क्षेत्रफल: 1316 हेक्टेयर 75 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क और बफर जोन NH-47 और NH-52 से कनेक्टिविटी दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर से सीधा जुड़ाव यह कॉरिडोर प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नेटवर्क से मजबूती से जोड़ेगा। --- उद्योग और रोजगार में तेज़ उछाल इस परियोजना से कई सेक्टर को सीधा फायदा मिलेगा: ऑटोमोबाइल टेक्सटाइल एग्री-प्रोसेसिंग इंजीनियरिंग वेयरहाउसिंग साथ ही लाखों युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा होंगे। --- सीएम का विजन: किसान से उद्योग तक मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल विकास नहीं, बल्कि किसानों की स्थायी समृद्धि है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जमीन लेने के साथ सरकार की जिम्मेदारी है कि किसान का भविष्य सुरक्षित किया जाए—और यह योजना उसी दिशा में बड़ा कदम है। --- राज्य में तेज़ी से बढ़ता निवेश 48 नए इंडस्ट्रियल पार्क स्थापित करीब 9 लाख करोड़ रुपये का निवेश देश में तेजी से औद्योगिक विकास करने वाले राज्यों में मध्यप्रदेश अग्रणी --- समग्र प्रभाव यह इकोनॉमिक कॉरिडोर सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि : किसान समृद्धि का मॉडल : औद्योगिक विकास का इंजन : रोजगार सृजन का केंद्र बनकर उभर रहा है। --- इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर मध्यप्रदेश के विकास की नई पहचान बन रहा है—जहां किसान, उद्योग और युवा, तीनों को साथ लेकर आगे बढ़ने का रोडमैप तैयार किया गया है। |