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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर देश की राजनीति और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है। 21 अगस्त को यहां जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था के विरोध में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटे। प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण व्यवस्था में बदलाव, आर्थिक आधार को अधिक महत्व देने और अवसरों में समानता की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान UGC के इक्विटी नियमों और आरक्षण व्यवस्था को लेकर भी विरोध के स्वर सुनाई दिए। बड़ी संख्या में लोगों के जुटने के बाद जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई और पुलिस तथा RAF की तैनाती की गई। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। पुलिस कार्रवाई बनी दूसरा बड़ा मुद्दा आरक्षण के सवाल के साथ-साथ प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई भी अब चर्चा का विषय बन गई है। प्रदर्शनकारियों की हिरासत और कथित बल प्रयोग को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी जंतर-मंतर की घटना में कथित पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाया है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने पहले ही स्पष्ट किया था कि 21 अगस्त के लिए प्रस्तावित आरक्षण-विरोधी प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी गई थी। बाद में सोशल मीडिया पर दोबारा प्रदर्शन के आह्वान को लेकर भी पुलिस ने लोगों को सावधान किया और कहा कि बिना अनुमति ऐसे जमावड़े से बचें। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने भी बढ़ाई हलचल इस पूरे मामले के बीच जंतर-मंतर के प्रदर्शन के नाम पर कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। फैक्ट-चेक में ऐसे ही एक वायरल वीडियो को गलत पाया गया। जांच में सामने आया कि वीडियो वास्तव में पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा का था, न कि जंतर-मंतर के आरक्षण-विरोधी प्रदर्शन का। अब बड़ा सवाल—आरक्षण व्यवस्था में बदलाव होगा? जंतर-मंतर से उठी आवाज ने एक बार फिर देश में आरक्षण व्यवस्था, सामाजिक न्याय और समान अवसर को लेकर पुरानी बहस को तेज कर दिया है। एक ओर प्रदर्शनकारी आर्थिक आधार और आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आरक्षण को सामाजिक एवं ऐतिहासिक असमानताओं को दूर करने का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। फिलहाल जंतर-मंतर का यह मुद्दा केवल एक प्रदर्शन तक सीमित नहीं दिख रहा। आरक्षण, पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शन के अधिकार को लेकर उठे सवाल आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को और तेज कर सकते हैं। |