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चीताखेड़ा। करीब 14 दिनों की लंबी बारिश की खेंच के बाद आखिरकार इंद्रदेव मेहरबान हुए। बुधवार शाम करीब साढ़े तीन बजे शुरू हुई बूंदाबांदी देखते ही देखते तेज बारिश में बदल गई, जो शाम लगभग सवा पांच बजे तक लगातार जारी रही। इस बारिश ने सूखे की मार झेल रही खरीफ फसलों को मानो संजीवनी दे दी। खेतों में मुरझाने लगी फसलों में फिर से हरियाली लौट आई और किसानों के चेहरों पर भी मुस्कान खिल उठी। अंचल में लगभग 14 दिन पहले हुई छिटपुट और अपर्याप्त बारिश के भरोसे किसानों ने खरीफ फसलों की बुवाई कर दी थी। पर्याप्त नमी नहीं मिलने से कई खेतों में बीज अंकुरित ही नहीं हो सके। लगभग 40 प्रतिशत किसानों को दोबारा, जबकि कई किसानों को तीसरी बार तक बुवाई करनी पड़ी। इसके बावजूद बारिश नहीं होने से किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही थी और फसलों की स्थिति बेहद नाजुक हो गई थी। पिछले चार दिनों से आसमान में बादल तो उमड़-घुमड़ रहे थे, लेकिन केवल हल्की फुहारें पड़ने से किसानों की उम्मीदें बार-बार टूट रही थीं। बुधवार शाम आखिरकार मौसम ने करवट ली और झमाझम बारिश शुरू हो गई। इस बारिश से खेतों में नई जान आ गई और किसानों को बड़ी राहत मिली। लहलहाती फसलों को देखकर किसानों का मन भी खुशी से झूम उठा। इधर, अच्छी बारिश की कामना को लेकर ग्रामीणों ने पारंपरिक आस्था और लोक परंपराओं का भी सहारा लिया। कहीं घास भेरू की गांव में परिक्रमा निकाली गई, तो कहीं गांव के बाहर उज्जैनी कर चूरमा-बाटी का भोग लगाया गया। कई स्थानों पर हवन-पूजन और खेड़ादेव की पूजा-अर्चना भी की गई। ग्रामीणों का मानना है कि इन धार्मिक अनुष्ठानों और प्रकृति की कृपा से आखिरकार इंद्रदेव प्रसन्न हुए और क्षेत्र पर मेहरबानी बरसाई। रिपोर्ट : दशरथ जी माली |