भोपाल / रतलाम/ सैलाना
मध्यप्रदेश के अनुसूचित क्षेत्रों में कार्यरत हजारों पेसा ग्राम सभा मोबिलाइजरों को सेवामुक्त किए जाने के आदेश के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। पंचायत राज संचालनालय भोपाल द्वारा 18 मई 2026 को जारी आदेश में प्रदेश के 20 जिलों की ग्राम पंचायतों में कार्यरत पेसा मोबिलाइजरों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने के निर्देश दिए गए हैं। इस आदेश के बाद प्रभावित युवाओं और उनके परिवारों में चिंता का माहौल है।
दरअसल, राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) के अंतर्गत वर्ष 2020 से अनुसूचित क्षेत्रों की 5221 ग्राम पंचायतों में एक-एक पेसा ग्राम सभा मोबिलाइजर की नियुक्ति की गई थी। इन मोबिलाइजरों का दायित्व पेसा कानून के तहत ग्राम सभाओं को सशक्त करना, ग्रामीणों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा शासन की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाना था।
पंचायत राज संचालनालय ने अब योजना की अवधि 31 मार्च 2026 को समाप्त होने और नई नीति निर्माण लंबित होने का हवाला देते हुए संबंधित ग्राम पंचायतों को मोबिलाइजरों को सेवामुक्त करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
इस फैसले का विरोध करते हुए सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर आदेश तत्काल निरस्त करने की मांग की है। विधायक डोडियार ने कहा कि जिन युवाओं ने पिछले कई वर्षों से ग्राम स्तर पर शासन और आदिवासी समाज के बीच सेतु बनकर कार्य किया, उन्हें बिना वैकल्पिक व्यवस्था के अचानक सेवा से हटाना अन्यायपूर्ण है। इससे हजारों परिवारों पर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
विधायक ने अपने आवेदन में यह भी उल्लेख किया कि पेसा कानून आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को अधिकार संपन्न बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है और मोबिलाइजरों की सेवाएं समाप्त होने से इस कानून के क्रियान्वयन पर गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से मांग की है कि नई नीति लागू होने तक अंतरिम व्यवस्था के रूप में सभी मोबिलाइजरों की सेवाएं और मानदेय यथावत जारी रखा जाए।
इस मुद्दे ने आदिवासी अंचलों में तेजी से तूल पकड़ लिया है। प्रभावित मोबिलाइजरों का कहना है कि वर्षों तक सेवा देने के बाद अचानक हटाए जाने से उनका भविष्य अंधकारमय हो गया है।
अब निगाहें मुख्यमंत्री और पंचायत विभाग पर टिकी हैं कि सरकार इस आदेश पर पुनर्विचार करती है
रिपोर्टर : जितेन्द्र कुमावत