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भीलवाड़ा : अखिल भारतीय श्री दादु सेवक समाज आपका ध्यान एक अत्यन्त गंभीर एवं संवेदनशील विषय की और आकर्षित करना चाहता है। संत सिरोमणि श्री दादूदयाल जी महाराज की पावन समाधि स्थली श्री भैराणा धाम (दादू खोल), जो दादू पंथ का "हरिद्वार" मानी जाती है, आज अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। यह पवित्र स्थल केवल एक धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि प्रकृति, जीव-जंतुओ और पर्यावरण संरक्षण का जीवंत उदाहरण भी है। लगभग 500 वर्ष पूर्व संत दादूदयाल जी महाराज ने जिस मानवता, अहिंसा, प्रकृति प्रेम और सह-अस्तित्व का संदेश दिया था, वह आज भी लाखो श्रद्धालुओ के जीवन का मार्गदर्शन कर रहा है। वर्तमान में सरकार द्वारा रीको को भूमि आवंटन के चलते इस पवित्र पर्वतीय क्षेत्र में खनन एवं औद्योगिक गतिविधिया तेजी से बढ़ रही है। इससे न केवल भैराणा धाम की भौगोलिक सरंचना को क्षति पहुंच रही है, बल्कि वहा निवास कर रहे हजारो की संख्या में राष्ट्रीय पक्षी मोर, वन्य जीव एवं पर्यावरणीय संतुलन भी गंभीर संकट में आ गया है। इस परिस्थिति में संत समाज एवं श्रद्धालुओ द्वारा भैराणा धाम को बचाने के लिये शांतिपूर्ण जन आंदोलन प्रारंभ किया गया है। इस जन आंदोलन को मद्देनजर रखते हुये वस्तुस्थिति का अवलोकन करते हुये रीको भूमि आवंटन को निरस्त करावे जिससे जन भावनाए बनी रह पायेगी और सरकार के प्रति रोष व्याप्त नहीं होगा। रिपोर्ट : राजकुमार गोयल |